जनपद पंचायत मझौली के अंतर्गत ग्राम पंचायतों में बने सामुदायिक भवनों के नामकरण को लेकर चल रहा विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है।
मझौली (जबलपुर)
ठाकुर विक्रम सिंह ठाकुर मनोहर सिंह द्वारा सोशल मीडिया पर मोर्चा खोलने के बाद क्षेत्र में राजनीतिक गर्मी बढ़ गई है। उन्होंने विधायक के नाम पर भवनों के नामकरण को “नियम विरुद्ध” और “अवैधानिक” करार दिया है।
सोशल मीडिया पर तंज: नियमों की अनदेखी का आरोप
ठाकुर विक्रम सिंह ने अपनी फेसबुक पोस्ट के जरिए इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए सीधे सवाल दागे हैं। उनका कहना है कि: सामुदायिक भवनों का नामकरण तय नियमों और प्रक्रियाओं के तहत ही होना चाहिए।
किसी भी जनप्रतिनिधि द्वारा पद पर रहते हुए अपने निजी नाम का उपयोग सरकारी भवनों पर करवाना वैधानिक रूप से उचित नहीं है।
इन ग्राम पंचायतों में है सर्वाधिक चर्चा
स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, गठौरा, हिनोता, सिमरिया घाट, दोनी और पटोरी जैसी ग्राम पंचायतों में सामुदायिक भवनों पर विधायक का नाम अंकित कराया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह कार्य बिना किसी ठोस वैधानिक आधार के किया गया है, जो कि पंचायत राज अधिनियम की भावना के विपरीत है।
क्या कहता है नियम?
विक्रम सिंह और स्थानीय विशेषज्ञों ने कानूनी प्रक्रिया का हवाला देते हुए बताया कि किसी भी सरकारी भवन के नामकरण के लिए एक निश्चित प्रक्रिया होती है:
ग्राम सभा का प्रस्ताव: सबसे पहले संबंधित ग्राम पंचायत की ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित होना अनिवार्य है।
कलेक्टर की स्वीकृति: ग्राम सभा के प्रस्ताव के बाद जिला कलेक्टर की अंतिम स्वीकृति आवश्यक होती है।
बिना इन प्रक्रियाओं के किया गया नामकरण शून्य और नियम विरुद्ध माना जाता है।
न्यायालय जा सकता है मामला
क्षेत्र में इस बात की प्रबल चर्चा है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही इन नामों को नहीं हटाया या नियमों के पालन की जांच नहीं की, तो यह मामला उच्च न्यायालय (High Court) की चौखट तक पहुंच सकता है। वर्तमान में स्थानीय लोगों की नजरें प्रशासन की भूमिका पर टिकी हैं कि क्या जिम्मेदार अधिकारी इस पर संज्ञान लेंगे या मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।
(रिपोर्ट: मझौली दर्पण न्यूज़)




