हाईकोर्ट सख्त: रीवा कलेक्टर और त्योंथर तहसीलदार तलब
जबलपुर
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने रीवा जिले में एक आदिवासी परिवार के खिलाफ चल रही बेदखली कार्रवाई पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने रीवा कलेक्टर और त्योंथर तहसीलदार सहित संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर तलब किया है और पूछा है कि आखिर किन नियमों के तहत यह कार्रवाई की गई।
क्या है मामला?
मामला रीवा जिले के गोदखुर्द गांव का है, जहां के निवासी वंशराज आदिवासी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर प्रशासनिक कार्रवाई को चुनौती दी।
याचिकाकर्ता के अनुसार—वह पिछले करीब 30 वर्षों से उक्त भूमि पर रह रहे हैं वहां उनका कच्चा मकान बना हुआ है कब्जे और निवास से जुड़े वैध दस्तावेज भी मौजूद हैं
इसके बावजूद प्रशासन द्वारा उन्हें बेदखल करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई
आबादी भूमि’ पर कार्रवाई पर सवाल याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता जी.एस. उद्दे और शिवांशु कोल ने कोर्ट में दलील दी कि— जिस जमीन से बेदखली का आदेश दिया गया, उसे पहले ही कलेक्टर द्वारा ‘आबादी भूमि’ घोषित किया जा चुका है
उस क्षेत्र में सैकड़ों परिवार वर्षों से बसे हुए हैं ऐसे में बिना ठोस आधार के बेदखली की कार्रवाई असंवैधानिक और नियमों के खिलाफ बताई गई।
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस संदीप भट्ट की एकलपीठ ने प्रशासन की जल्दबाजी पर सवाल उठाए।
कोर्ट ने कहा कि—जब भूमि आबादी घोषित है और कब्जा वर्षों पुराना है, तो बिना उचित प्रक्रिया के बेदखली का आदेश न्यायोचित नहीं लगता।”
हाईकोर्ट ने सभी संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर 3 सप्ताह के भीतर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। सैकड़ों परिवारों को राहत की उम्मीद इस मामले के बाद क्षेत्र के उन सैकड़ों परिवारों में उम्मीद जगी है, जो इसी तरह की बेदखली कार्रवाई के डर में जी रहे हैं।
अगर कोर्ट से याचिकाकर्ता को राहत मिलती है, तो इसका असर पूरे क्षेत्र में देखने को मिल सकता है।
(मझौली दर्पण न्यूज़)




