सूचना के अधिकार पर भारी पड़ा भ्रष्टाचार का डर! ग्राम पंचायत रानीताल के करोड़ों के कार्यों पर उठे सवाल
मझौली (जबलपुर)
जनपद पंचायत मझौली के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत रानीताल इन दिनों भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों और आरटीआई (RTI) के प्रति उदासीनता को लेकर सुर्खियों में है। वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच पंचायत में कराए गए विकास कार्यों में भारी वित्तीय अनियमितता और लोक धन के दुरुपयोग की आशंका जताई जा रही है। मामले में पारदर्शिता की मांग करते हुए जब एक जागरूक नागरिक ने सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी, तो पंचायत प्रशासन ने चुप्पी साध ली, जिससे संदेह और गहरा गया है।
अंधेरे में विकास कार्य: जानकारी देने से बच रहे जिम्मेदार
आवेदक द्वारा पंचायत के पिछले 5 वर्षों के निर्माण कार्यों की तकनीकी स्वीकृति (TS), प्रशासकीय स्वीकृति (AS), भुगतान वाउचर, माप पुस्तिका (MB) और ऑडिट रिपोर्ट की सत्यापित प्रतियां मांगी गई थीं। नियमानुसार 30 दिनों के भीतर जानकारी उपलब्ध कराई जानी अनिवार्य है, लेकिन समय सीमा बीतने के बाद भी लोक सूचना अधिकारी द्वारा कोई जवाब नहीं दिया गया। स्थानीय गलियारों में चर्चा है कि करोड़ों के कार्यों में हुए ‘कागजी खेल’ को छिपाने के लिए ही सूचना देने में आनाकानी की जा रही है।
बीपीएल आवेदक की भी अनदेखी: कानून की धज्जियां उड़ीं
मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब यह सामने आया कि आवेदक बीपीएल (गरीबी रेखा के नीचे) श्रेणी का है। आरटीआई अधिनियम के अनुसार बीपीएल श्रेणी के आवेदकों को जानकारी निःशुल्क और प्राथमिकता के आधार पर दी जानी चाहिए। जानकारी न देना न केवल आवेदक के अधिकारों का हनन है, बल्कि सीधे तौर पर सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की अवमानना है।
आशंकाएं: क्या एक ही काम का हुआ दोहरा भुगतान?
सूत्रों की मानें तो रानीताल पंचायत में कई ऐसे कार्य हैं जो जमीन पर अधूरे हैं लेकिन कागजों में उन्हें पूर्ण दिखाकर भुगतान निकाल लिया गया है। कुछ कार्यों में बिना उचित स्वीकृति के ही राशि आहरित करने और एक ही निर्माण कार्य का दो बार भुगतान लेने जैसे गंभीर वित्तीय अपराधों की बू आ रही है।
प्रथम अपील में पहुंची गुहार, ₹25,000 जुर्माने की मांग
लोक सूचना अधिकारी की कार्यप्रणाली से क्षुब्ध होकर आवेदक ने अब प्रथम अपीलीय अधिकारी (CEO, जनपद पंचायत मझौली) के समक्ष अपील दायर कर दी है। अपील में मांग की गई है कि:15 दिवस के भीतर समस्त जानकारी निःशुल्क उपलब्ध कराई जाए। सूचना में देरी करने वाले दोषी अधिकारी पर अधिनियम की धारा 20 के तहत ₹250 प्रति दिन (अधिकतम ₹25,000) का जुर्माना लगाया जाए।
रानीताल पंचायत के कार्यों की किसी स्वतंत्र एजेंसी या जिला स्तरीय टीम से उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में लंबे समय से तानाशाही और अपारदर्शिता का माहौल है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस ‘सफेद हाथी’ बन चुके भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाता है या मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।




