साइबर वॉर, अंडरसी केबल और ग्लोबल नेटवर्क पर मंडराता खतरा, विशेषज्ञों ने जताई चिंता
नई दिल्ली/विश्व डेस्क
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान, इसराइल और अमेरिका के बीच संभावित टकराव ने वैश्विक स्तर पर कई नई चिंताओं को जन्म दिया है। इनमें सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या इस जंग का असर इंटरनेट जैसी वैश्विक सेवा पर भी पड़ सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक युद्ध अब केवल हथियारों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि साइबर वॉरफेयर इसका अहम हिस्सा बन चुका है। ऐसे में यदि हालात और बिगड़ते हैं, तो इंटरनेट सेवाओं पर भी असर पड़ सकता है।
तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, युद्ध की स्थिति में देश एक-दूसरे के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना सकते हैं। बैंकिंग, संचार और सरकारी वेबसाइट्स पर बड़े पैमाने पर साइबर हमले हो सकते हैं। इससे इंटरनेट की गति धीमी होने या सेवाएं बाधित होने की आशंका बनी रहती है।
दुनिया भर में इंटरनेट का बड़ा हिस्सा समुद्र के नीचे बिछी फाइबर ऑप्टिक केबल्स के जरिए चलता है। यदि युद्ध के दौरान इन केबल्स को नुकसान पहुंचता है, तो कई देशों में इंटरनेट सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। मध्य पूर्व क्षेत्र इन केबल्स के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि कई बार देश अपनी आंतरिक सुरक्षा के मद्देनजर खुद ही इंटरनेट सेवाएं सीमित या बंद कर सकते हैं। ऐसे उदाहरण पहले भी सामने आ चुके हैं, जब तनावपूर्ण हालात में इंटरनेट पर नियंत्रण लगाया गया।
तकनीकी जानकारों का कहना है कि पूरी दुनिया का इंटरनेट एक साथ बंद होना लगभग असंभव है, क्योंकि इसका नेटवर्क बेहद विकेंद्रीकृत (Decentralized) है। हालांकि, कुछ क्षेत्रों या देशों में अस्थायी बाधाएं जरूर आ सकती हैं।
ईरान-इसराइल-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक स्तर पर कई क्षेत्रों में पड़ सकता है, जिसमें इंटरनेट भी शामिल है। हालांकि पूरी तरह इंटरनेट ठप होने की संभावना कम है, लेकिन साइबर हमलों और क्षेत्रीय व्यवधानों से इनकार नहीं किया जा सकता।
— मझौली दर्पण न्यूज




