प्रशासनिक सुस्ती और वित्तीय अनियमितताओं पर गिरी गाज, जांच के आदेश से मचा हड़कंप
सीधी।
जिले में प्रशासनिक और वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर बड़ा एक्शन सामने आया है। राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए सीधी कलेक्टर को पद से हटा दिया है, वहीं जिला सहकारी बैंक के महाप्रबंधक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद पूरे जिले में हड़कंप की स्थिति बन गई है और कई विभागों में हलचल तेज हो गई है।
सूत्रों के अनुसार, कलेक्टर पर लंबे समय से प्रशासनिक सुस्ती और फाइलों के लंबित रहने के आरोप लग रहे थे। कई महत्वपूर्ण योजनाओं की प्रगति प्रभावित होने और जन शिकायतों के समय पर निराकरण न होने की शिकायतें शासन तक पहुंच रही थीं। इसी आधार पर उच्च स्तर पर समीक्षा के बाद यह सख्त निर्णय लिया गया।
वहीं दूसरी ओर जिला सहकारी बैंक के महाप्रबंधक पर वित्तीय अनियमितताओं और बड़े स्तर पर गड़बड़ी के आरोप सामने आए हैं। प्रारंभिक जांच में करोड़ों रुपए के लेनदेन में संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिली है, जिसके बाद शासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया। मामले की विस्तृत जांच के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।
बताया जा रहा है कि सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि भ्रष्टाचार और लापरवाही को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। “जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत लगातार कार्रवाई की जा रही है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बनाया जा सके।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। आम जनता भी इस कार्रवाई को बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देख रही है।
सीधी में हुई यह बड़ी कार्रवाई न केवल प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की दिशा में अहम कदम है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि अब लापरवाही और अनियमितताओं पर सीधी कार्रवाई होगी। आने वाले दिनों में जांच के परिणाम और भी बड़े खुलासे कर सकते हैं।
मझौली दर्पण न्यूज




