जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत आयोजित पत्रकार वार्ता में प्रहलाद सिंह पटेल, मंत्री, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, मध्यप्रदेश शासन ने मत्स्य पालन नीति 2008 के क्रियान्वयन को लेकर बड़ा बयान दिया।
नरसिंहपुर
उन्होंने स्पष्ट कहा कि वंशानुगत एवं परंपरागत मछुआरों के अधिकारों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी
पत्रकार वार्ता में मंत्री ने कहा कि प्रदेश के कई जिलों में अमृत सरोवरों और तालाबों के पट्टों के आवंटन में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं। इस पर उन्होंने तत्काल संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि—पात्र परंपरागत मछुआरों को प्राथमिकता दी जाए
किसी भी प्रकार की भ्रष्टाचार या मनमानी पर सख्त कार्रवाई हो
पट्टा प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और नियमसम्मत बनाई जाए
मध्य प्रदेश सरकार की नीति के अनुसार, जल संसाधनों पर पहला अधिकार उन मछुआरों का है, जो वर्षों से इस कार्य से जुड़े हैं। मंत्री ने दोहराया कि—“सरकार का उद्देश्य है कि असली हितग्राहियों को उनका हक मिले, किसी बिचौलिये या प्रभावशाली व्यक्ति को नहीं।”
मंत्री ने संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि—सभी आवंटित पट्टों की **समीक्षा (Review) की जाए
जहां गड़बड़ी पाई जाए, वहां पट्टे निरस्त कर पुनः आवंटन किया जाए जिम्मेदार अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए
नरसिंहपुर में आयोजित इस पत्रकार वार्ता के बाद स्थानीय मछुआरों में न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। लंबे समय से वे पट्टा वितरण में पारदर्शिता और अधिकार की मांग कर रहे थे।
मत्स्य पालन नीति 2008 के सही क्रियान्वयन को लेकर सरकार का यह रुख साफ संकेत देता है कि अब **जल संसाधनों पर वास्तविक हितग्राहियों का अधिकार सुनिश्चित किया जाएगा**। यदि निर्देशों का सख्ती से पालन हुआ, तो यह कदम न केवल मछुआरों की आजीविका मजबूत करेगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा देगा।




