पनागर के विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय में पिछले 7 वर्षों से चल रहे एक बड़े वित्तीय घोटाले का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। “
पनागर/जबलपुर
कलम के जादूगरों” ने सॉफ्टवेयर में हेरफेर कर सरकारी खजाने से 1 करोड़ 11 लाख 45 हजार 914 रुपये की राशि गायब कर दी। यह मामला अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गया है।
मामले का पर्दाफाश तब हुआ जब भोपाल मुख्यालय से प्राप्त डाटा रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिले। रिपोर्ट में लेन-देन और रिकॉर्ड में भारी अंतर पाया गया, जिससे अधिकारियों के होश उड़ गए।
गंभीरता को देखते हुए जबलपुर कलेक्टर ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 9 सदस्यीय विशेष जांच समिति का गठन किया है। यह टीम पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रही है, जिसमें सॉफ्टवेयर एंट्री, भुगतान प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की भूमिका शामिल है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि—भुगतान से जुड़े सॉफ्टवेयर में जानबूझकर छेड़छाड़ की गई फर्जी एंट्री कर रकम को अलग-अलग खातों में डायवर्ट किया गया वर्षों तक ऑडिट और निगरानी प्रणाली को चकमा दिया गया
यह कोई साधारण गड़बड़ी नहीं, बल्कि सुनियोजित वित्तीय डकैती मानी जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, इस घोटाले में विभाग के कई कर्मचारी और अधिकारी संलिप्त हो सकते हैं। जांच कमेटी अब संबंधित दस्तावेजों और बैंक ट्रांजैक्शन की पड़ताल कर रही है।
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।
निलंबन और बर्खास्तगी की कार्रवाई संभव आपराधिक मामला दर्ज होने के भी संकेत
इतनी बड़ी राशि के गबन से आम जनता में भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभाग में इस तरह की लूट **व्यवस्था पर बड़ा सवाल** खड़ा करती है।
पनागर शिक्षा विभाग का यह घोटाला न सिर्फ वित्तीय अनियमितता का मामला है, बल्कि यह सिस्टम की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाता है। अब सबकी नजर जांच कमेटी की रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे यह साफ होगा कि इस “सॉफ्टवेयर डकैती” के पीछे असली चेहरे कौन हैं।




