शहर के वार्ड क्रमांक 26 स्थित एक सार्वजनिक पार्क को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।
सतना
आरोप है कि प्रतिमा बागरी, जो वर्तमान में नगरीय प्रशासन राज्यमंत्री हैं, ने अपने आवास के पास बने पार्क के आधे हिस्से पर तारबंदी कर ताला जड़वा दिया है। पिछले दो वर्षों से आम नागरिकों का उस हिस्से में प्रवेश बंद बताया जा रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार नगर निगम द्वारा विकसित इस पार्क के आधे भाग को घेरकर मुख्य प्रवेश द्वार पर ताला लगा दिया गया। आरोप है कि विधायक बनने और फिर राज्यमंत्री का पद मिलने के बाद यह व्यवस्था कराई गई। अब उस हिस्से में आम जनता को जाने की अनुमति नहीं है।
पार्क के अंदर बने एक कमरे में राज्यमंत्री के सुरक्षा कर्मी और पायलट के आराम करने की बात सामने आई है। रहवासियों का कहना है कि दिनभर वहां सरकारी वाहन और सुरक्षाकर्मी नजर आते हैं, जिससे लोग विरोध करने से भी कतराते हैं। कई बार शिकायत की गई, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
वार्ड पार्षद महेंद्र पांडेय का कहना है कि पार्क के उस हिस्से में कुछ लोग बैठकर शराब पीते थे, इसलिए सुरक्षा के मद्देनजर आधा एरिया बंद कराया गया।
वहीं किसान कांग्रेस नेता अखंड प्रताप सिंह ने इसे “सत्ता का दुरुपयोग” बताते हुए प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द कदम नहीं उठाए गए तो कांग्रेस सड़कों पर उतरेगी।
रहवासियों ने बताया कि पार्क के जिस हिस्से को बंद किया गया है, वहीं टीन शेड के नीचे मोहल्ले के बच्चे गणेश उत्सव और दुर्गा महोत्सव पर प्रतिमाएं स्थापित कर पूजा-अर्चना करते थे। अब वह स्थान बंद होने से बच्चों और युवाओं को वैकल्पिक जगह तलाशनी पड़ रही है।
नगरीय प्रशासन विभाग की जिम्मेदारी शहरों से अतिक्रमण हटाकर सौंदर्यीकरण सुनिश्चित करने की होती है। ऐसे में यदि सार्वजनिक पार्क के हिस्से पर कब्जे के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह प्रशासनिक नैतिकता और पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
हालांकि इस संबंध में राज्यमंत्री से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
मामला अब राजनीतिक रंग ले चुका है। शहर की नजरें प्रशासनिक जांच और संभावित कार्रवाई पर टिकी हैं—क्या पार्क आम जनता के लिए पूरी तरह खुलेगा या विवाद यूं ही चलता रहेगा?




