लखनादौन नगर परिषद में शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की दुकानों के आवंटन में बड़े पैमाने पर अनियमितता उजागर हुई है।
सिवनी
जांच के बाद आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ जबलपुर (EOW) ने नगर परिषद की अध्यक्ष मीना बलराम गोल्हानी सहित 23 लोगों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया है। आरोप है कि नियमों को दरकिनार कर दुकानों का मनमाना आवंटन किया गया, जिससे शासन को करीब **83 लाख रुपये** की राजस्व क्षति हुई।
जानकारी के अनुसार चट्टी से बस स्टैंड मार्ग पर बने आठ शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में 75 दुकानों की नीलामी की गई थी। नियमानुसार 21 दिन में 25% राशि और 120 दिन में शेष राशि जमा कर अनुबंध करना अनिवार्य था।
जांच में सामने आया कि 24 अगस्त 2020 से 18 अक्टूबर 2024 के बीच कई दुकानदारों को बिना पूरी राशि जमा कराए और बिना विधिवत अनुबंध के कब्जा दे दिया गया। सत्यापन में 32 दुकानों में से 13 दुकानदारों द्वारा लगभग 79.82 लाख रुपये जमा न करने तथा करीब 2.88 लाख रुपये किराया वसूली न होने की पुष्टि हुई।
मामला तब तूल पकड़ा जब जबलपुर निवासी रविंद्र सिंह आनंद की शिकायत पर जांच शुरू हुई। आरोप है कि आरक्षित वर्ग की दुकान क्रमांक 7 को बिना पुनः नीलामी कराए सामान्य वर्ग के वैभव दुबे को आवंटित कर दिया गया। नियम के अनुसार तीन बार नीलामी विफल होने पर ही दुकान अनारक्षित की जा सकती थी, लेकिन पीआईसी बैठक में प्रस्ताव पारित कर सीधे लाभ पहुंचाया गया।
ईओडब्ल्यू ने तत्कालीन सीएमओ गजेंद्र पांडे, गीता वाल्मीक, वर्तमान राजस्व उपनिरीक्षक रवि गोल्हानी, पीआईसी सदस्यों सहित 14 दुकानदारों पर मिलीभगत और पद के दुरुपयोग के आरोप में मामला दर्ज किया है।
प्रकरण में भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 120-बी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7(सी), 13(1)(ए), 13(2) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू कर दी गई है।
नगर परिषद में हुए इस कथित घोटाले ने स्थानीय राजनीति में हलचल मचा दी है। विपक्ष ने इसे “संगठित राजस्व लूट” करार देते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है। वहीं प्रशासनिक हलकों में भी यह मामला चर्चाओं का केंद्र बना हुआ है।
ईओडब्ल्यू की जांच आगे बढ़ने के साथ ही यह स्पष्ट होगा कि इस कथित घोटाले की परतें कितनी गहरी हैं और जिम्मेदारी किस स्तर तक तय होती है।




