पंकज उपाध्याय ने रजक को SC, केवट–माझी को ST में शामिल करने की उठाई मांग
भोपाल।
मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में सामाजिक न्याय का मुद्दा जोरदार ढंग से उठा। कांग्रेस विधायक **पंकज उपाध्याय** ने सदन में रजक समाज को अनुसूचित जाति (SC) और केवट–माझी समाज को अनुसूचित जनजाति (ST) में शामिल करने की मांग रखते हुए सरकार से ठोस पहल करने को कहा।
विधायक उपाध्याय ने कहा कि ये दोनों समुदाय ऐतिहासिक रूप से वंचित, आर्थिक रूप से कमजोर और सामाजिक रूप से पिछड़े रहे हैं, लेकिन वर्तमान आरक्षण ढांचे में उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि शिक्षा, रोजगार और सरकारी योजनाओं में वास्तविक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए इन समुदायों को उपयुक्त श्रेणी में शामिल करना आवश्यक है
उपाध्याय ने कहा कि रजक समाज परंपरागत रूप से श्रम आधारित कार्यों से जुड़ा रहा है और आज भी बड़ी संख्या में परिवार गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। वहीं केवट–माझी समाज का जीवन जल संसाधनों, नाव संचालन और मत्स्य व्यवसाय से जुड़ा रहा है, जो आदिवासी जीवन शैली के समान है। ऐसे में सामाजिक-आर्थिक सर्वे कराकर उन्हें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति में शामिल करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाना चाहिएं
सत्तापक्ष की ओर से कहा गया कि किसी भी जाति को SC/ST सूची में शामिल करने की प्रक्रिया संवैधानिक प्रावधानों के तहत होती है। इसके लिए राज्य सरकार द्वारा प्रस्ताव, सामाजिक-आर्थिक अध्ययन, रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया और राष्ट्रीय आयोग की अनुशंसा के बाद केंद्र सरकार अधिसूचना जारी करती है।
इस मुद्दे के उठते ही सदन में समर्थन और विरोध दोनों देखने को मिले। संबंधित समाजों के प्रतिनिधियों ने विधायक के प्रयास का स्वागत किया है, जबकि कुछ संगठनों ने कहा कि किसी भी परिवर्तन से पहले व्यापक अध्ययन और सभी पक्षों की सहमति जरूरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राज्य सरकार औपचारिक प्रस्ताव भेजती है तो यह मामला केंद्र के स्तर पर लंबी प्रक्रिया से गुजरेगा। फिलहाल, विधानसभा में यह मांग सामाजिक न्याय की बहस को नई दिशा दे गई है।
अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि राज्य सरकार इस मांग पर क्या आधिकारिक कदम उठाती है।




