जनता का पैसा लूटा तो कुर्सी नहीं बचेगी” — जवाबदेही से बचते दिखे CEO
जबलपुर
जनपद पंचायत कार्यालय में लगभग 50 लाख रुपये के कथित समयमान वेतनमान घोटाले को लेकर प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। आरोप है कि नियमों को दरकिनार कर वेतनमान स्वीकृत किए गए, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। जब इस गंभीर मामले पर जनपद पंचायत के CEO विनोद पाण्डे से पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो स्पष्ट जवाब देने के बजाय टालमटोल और संवाद से बचने का रवैया सामने आया।
सूत्रों का कहना है कि फाइलों में प्रक्रियागत अनियमितताएं और वित्तीय स्वीकृतियों में विसंगतियां दर्ज हैं। ऐसे में पारदर्शिता की अपेक्षा थी, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी की चुप्पी ने संदेह और गहरा कर दिया है। लोकतंत्र में प्रशासनिक पद जवाबदेही का प्रतीक होता है, अहंकार का नहीं। मीडिया के सवालों से बचना और असहजता दिखाना कई नए प्रश्न खड़े करता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि मीडिया के प्रति यह रवैया है, तो आम नागरिकों की शिकायतों पर क्या स्थिति होती होगी? मामला सीधे तौर पर जनता के टैक्स के पैसों से जुड़ा है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल वित्तीय गड़बड़ी नहीं, बल्कि विश्वासघात भी माना जाएगा।
जनता अब स्पष्ट और तथ्यात्मक जवाब चाहती है। प्रशासन को चाहिए कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करे। क्योंकि एक बात तय है—जनता का पैसा लूटा तो कुर्सी बचाना मुश्किल होगा।




