सीवेज टेंडर से पहले बड़ा खेल?
जबलपुर | संवाददाता
जबलपुर नगर निगम द्वारा प्रस्तावित करीब ₹750 करोड़ के सीवेज प्रोजेक्ट से पहले ही एक बड़े खेल की आहट सुनाई देने लगी है। आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में शामिल कुछ कंपनियों के अनुभव प्रमाण पत्र (Experience Certificates) में गंभीर विसंगतियां पाई गई हैं, जिससे पूरे टेंडर की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक एक ही सीवेज परियोजना के नाम पर एक से अधिक “कंप्लीशन सर्टिफिकेट” प्रस्तुत किए गए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इन प्रमाण पत्रों में कार्य अवधि, लागत, कार्य प्रगति और पूर्णता तिथि में स्पष्ट अंतर है, जो सामान्य प्रक्रिया के विपरीत है। नियमों के अनुसार किसी भी परियोजना के लिए एक ही मान्य पूर्णता प्रमाण पत्र जारी किया जाता है, ऐसे में कई-कई सर्टिफिकेट होना संदेह को और गहरा करता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अनुभव प्रमाण पत्रों में हेराफेरी के आधार पर किसी कंपनी को अर्ह घोषित किया गया, तो यह मध्यप्रदेश वित्तीय नियम, निविदा शर्तों और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम का खुला उल्लंघन होगा। ऐसे मामलों में न केवल टेंडर निरस्त किया जा सकता है, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों और कंपनियों पर आपराधिक कार्रवाई का प्रावधान भी है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब इतनी बड़ी राशि का प्रोजेक्ट दांव पर है, तो टेक्निकल स्क्रूटनी कमेटी और नगर निगम के संबंधित अधिकारियों ने इन विसंगतियों को कैसे नजरअंदाज किया? क्या अनुभव प्रमाण पत्रों की क्रॉस-वेरिफिकेशन की गई, या फिर आंखें मूंद ली गईं?
अब शहर की जनता और सामाजिक संगठनों की मांग है कि टेंडर प्रक्रिया को तत्काल स्थगित कर स्वतंत्र तकनीकी और वित्तीय जांच कराई जाए। क्योंकि यदि शुरुआत ही संदिग्ध रही, तो आने वाले समय में यह सीवेज प्रोजेक्ट भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ सकता है।




