मझौली स्थित प्राचीन विष्णु वराह मंदिर को लेकर दायर सूचना का अधिकार (RTI) आवेदन पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने स्पष्ट जवाब देकर स्थिति साफ कर दी है।
जबलपुर/मझौली
ASI, जबलपुर मंडल ने लिखित रूप से सूचित किया है कि विष्णु वराह मंदिर, मझौली केन्द्रीय संरक्षित स्मारक नहीं है इसलिए वह ASI के संरक्षण के अंतर्गत नहीं आता।
यह जानकारी श्री शिवम साहू, निवासी वार्ड क्रमांक-10, तहसील मझौली द्वारा दायर RTI आवेदन (दिनांक 29/12/2025) के उत्तर में दी गई है। ASI जबलपुर मंडल द्वारा जारी पत्र क्रमांक JBP/RTI/2025-26/45-53 दिनांक 06/01/2026 में यह स्पष्ट किया गया कि उक्त मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, जबलपुर सर्किल के अधीन केंद्रीय संरक्षित स्मारकों की सूची में शामिल नहीं है, अतः RTI आवेदन का निष्पादन किया जाता है।
इस जवाब ने क्षेत्र में लंबे समय से चल रही उस चर्चा पर विराम लगा दिया है, जिसमें विष्णु वराह मंदिर को ASI संरक्षित स्मारक माना जा रहा था। अब यह स्पष्ट हो गया है कि मंदिर के संरक्षण, रखरखाव और विकास की जिम्मेदारी ASI की नहीं, बल्कि संबंधित राज्य शासन अथवा स्थानीय निकायों की होगी।
ASI द्वारा यह भी बताया गया है कि यदि आवेदक उत्तर से असंतुष्ट है तो वह प्रथम अपील कर सकता है। इसके लिए प्रथम अपीलीय अधिकारी के रूप में डॉ. शिवाकान्त बाजपेयी, अधीक्षण पुरातत्वविद, ASI जबलपुर मंडल का नाम व पता भी पत्र में उल्लेखित किया गया है।
स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि अब जबकि ASI ने स्थिति स्पष्ट कर दी है, तो राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन को आगे आकर इस ऐतिहासिक मंदिर के संरक्षण और विकास के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रह सके।




