मध्य प्रदेश के सबसे बड़े जाति प्रमाण पत्र घोटाले में बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है।
भोपाल
तीन दशक पुरानी कथित हेराफेरी के चलते एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की आईपीएस बनने की राह थम गई है। राज्य स्तरीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति ने एक एएसपी स्तर के अधिकारी का जाति प्रमाण पत्र अमान्य कर दिया है, जिससे पूरा मामला फिर सुर्खियों में आ गया है।
जांच के दौरान तीन गांवों और दो जिलों तक पड़ताल की गई, जहां दर्जनों गवाहों के बयान दर्ज हुए। समिति के सामने प्रस्तुत दस्तावेज़, स्थानीय रिकॉर्ड और गवाहियों के आधार पर यह निष्कर्ष निकला कि संबंधित अधिकारी ने वर्षों पहले कथित तौर पर गलत तरीके से जाति प्रमाण पत्र हासिल किया। आरोप है कि इसी प्रमाण पत्र के सहारे उन्होंने सेवा में आगे बढ़त हासिल की।
सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में समय-समय पर शिकायतें की गईं, लेकिन सिस्टम की चूक और ढिलाई के चलते कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाई। अब जब राज्य स्तरीय समिति ने प्रमाण पत्र को अमान्य कर दिया है, तो न केवल अधिकारी का करियर बल्कि पूरे तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
मामले के उजागर होने के बाद पुलिस महकमे और प्रशासन में हलचल तेज है। आगे की कार्रवाई, विभागीय जांच और संभावित कानूनी कदमों पर सभी की नजरें टिकी हैं। यह प्रकरण न सिर्फ एक अधिकारी की कहानी है, बल्कि यह भी बताता है कि कैसे वर्षों पुरानी गड़बड़ियां आखिरकार सच के सामने आ ही जाती हैं।




