मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने रिश्वत प्रकरण की मूल फाइल गायब होने को “न्याय व्यवस्था से खिलवाड़” मानते हुए बेहद सख्त रुख अपनाया है।
जबलपुर
न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने दोषी अधिकारी के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने और विभागीय जांच शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
मामला जबलपुर पीडब्ल्यूडी में पदस्थ हेड क्लर्क अनिल कुमार पाठक से जुड़ा है, जिन्हें 26 अगस्त 2019 को लोकायुक्त ने तीन हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा था। ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई के दौरान खुलासा हुआ कि प्रकरण की मूल फाइल ही गायब है।
लोकायुक्त एसपी अंजुलता पटले ने कोर्ट को बताया कि प्रारंभिक जांच में तत्कालीन प्रभारी डीएसपी और निरीक्षक आस्कर किंडो ने फाइल गुम होने की जिम्मेदारी स्वीकार की है। हाईकोर्ट ने डीजीपी, विशेष पुलिस स्थापना भोपाल को तीन दिन में एफआईआर दर्ज कर रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सेवानिवृत्ति के बावजूद विभागीय कार्रवाई अनिवार्य होगी।




