स्थानीय बाबाताल स्थित प्राचीन शिव मंदिर इन दिनों आस्था, श्रद्धा और भक्ति के अद्भुत संगम का साक्षी बन गया है।
सिहोरा
नौ दिवसीय श्रीमद् देवी भागवत महापुराण कथा के भव्य आयोजन में प्रतिदिन श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ रही है। मंगलवार को व्यास गद्दी से कथा वाचक पंडित इंद्रमणि त्रिपाठी ने माँ भगवती के दिव्य स्वरूपों का ऐसा भावपूर्ण वर्णन किया कि पूरा मंदिर परिसर “जय माता दी” के जयकारों से गूंज उठा।
कथा के दौरान पंडित त्रिपाठी ने माँ भुवनेश्वरी और माता महालक्ष्मी की महिमा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि माँ भुवनेश्वरी सम्पूर्ण ब्रह्मांड की अधिष्ठात्री शक्ति हैं, जिनकी इच्छा से सृष्टि का सृजन, संचालन और संहार होता है। वहीं माता महालक्ष्मी को केवल धन की देवी न मानकर उन्होंने शुद्ध आचरण, सद्बुद्धि और जीवन में संतुलन की प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि जो भक्त निष्काम भाव से भगवती की शरण में जाता है, उसके जीवन में ऐश्वर्य के साथ-साथ मानसिक शांति भी स्वतः प्राप्त होती है।
देवी भागवत के प्रसंगों के माध्यम से कथा व्यास ने महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती—इन त्रिगुणात्मक स्वरूपों की गूढ़ व्याख्या की। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब-जब अधर्म का प्रकोप बढ़ता है, तब-तब जगत जननी माँ जगदंबा विभिन्न अवतारों में प्रकट होकर भक्तों की रक्षा और धर्म की स्थापना करती हैं। उनकी अमृतमयी वाणी ने श्रोताओं को भक्ति के मार्ग पर चलकर जीवन के कष्टों से मुक्ति पाने का संदेश दिया।
कथा के दौरान भजनों और जयकारों से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। आसपास के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों से बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं। आयोजन समिति द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु समुचित व्यवस्थाएं की गई हैं। प्रतिदिन कथा के समापन पर महाआरती एवं प्रसाद वितरण किया जा रहा है।
समिति के सदस्यों ने बताया कि नौ दिनों तक चलने वाला यह धार्मिक अनुष्ठान क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और आध्यात्मिक चेतना के विस्तार के संकल्प के साथ आयोजित किया गया है।




