उत्तर प्रदेश में फिर से एक बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है — इस बार राज्य की सबसे संवेदनशील योजना, मिड-डे मील (एमडीएम) के नाम पर।
यहां के जिले बलरामपुर में 11 करोड़ रुपये से अधिक के कथित घोटाले के सिलसिले में कुल 44 लोगों पर FIR दर्ज की गई है; जिसमें योजना के जिला समन्वयक समेत कई स्कूल, मदरसा और अन्य संस्थाओं के प्रभारी शामिल हैं।
बलरामपुर (उत्तर प्रदेश)
क्या है पूरा मामला
शिकायत के आधार पर की गई जांच में पाया गया कि कई विद्यालयों और मदरसों में छात्रों की संख्या फर्जी दिखा कर बजट हड़प लिया गया।
आरोप है कि फर्जी नामों और inflated data के ज़रिए सरकार की ओर से मिले कन्वर्ज़न कॉस्ट (Conversion Cost) में हेराफेरी की गई — यानी, खाने के नाम पर बजट लेकर उसे वश में कर लिया गया।
मामले में, जिलाधिकारी और बेसिक शिक्षा अधिकारी की संस्तुति पर पुलिस ने दायर FIR के बाद 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है; वहीं अन्य 39 नामजद व कई अज्ञात आरोपी भी जांच के दायरे में हैं। इसके साथ ही — कुछ मदरसों के प्रधानाध्यापकों, ग्राम प्रधानों व प्रबंधन समिति अध्यक्षों को निलंबित किया जा चुका है।
गंभीर प्रश्न — बच्चों और शिक्षा का अपहरण
यह सिर्फ पैसों का खेल नहीं है — इसके पीछे है बच्चों के हक और उनके पोषण-भोजन का ग़लत इस्तेमाल।
जिन मदरसाओं/विद्यालयों में बच्चों का नाम तक नहीं था, उन्हें बजट दिए गए। मतलब — खाने के नाम पर सरकारी रकम का खुलेआम दुरुपयोग
*वास्तविक जरूरतमंद बच्चों तक मिड-डे मील का लाभ नहीं पहुँचा, जबकि सरकारी पैसे निजी जेबों में चले गए।
यह घोटाला संकेत है — सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि योजना के तंत्र में लंबे समय तक चल रही सांठ-गांठ।
कौन-कौन आरोपी? — तोड़ी गयी मासूमियत की शिनाख्त
FIR में शामिल प्रमुख आरोपी:
जिला समन्वयक Firoz Ahmad Khan — आरोप है कि उन्होंने सर्वाधिक फर्जीवाड़ा orchestrate किया।
मदरसाओं के प्रधानाचार्य, ग्राम प्रधान, विद्यालय प्रबंधन समिति अध्यक्ष — जिन्होंने मिलकर फर्जी स्कूल-एन्फोलमेंट प्रस्तुत किए।
कुछ सहायक शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों — जिन्होंने हेराफेरी के एक्सल शीट तैयार एवं संलिप्तता में सहयोग किया।
पुलिस ने गिरफ्तारियां आरंभ कर दी हैं, और पूरे मामले की आगे गहन जांच की जा रही है।




