मध्य प्रदेश के गुना जिले की बमोरी विधानसभा से एक हिला देने वाली घटना सामने आई है।
गुना
यहाँ ग्राम बागेरी में खाद लेने पहुँची एक आदिवासी महिला भूरियाबाई (उम्र लगभग 50 वर्ष) की मौत हो गई। परिवार के आरोप बेहद गंभीर हैं—भूरियाबाई पिछले दो दिनों से खाद की लाइन में लगी थीं, लेकिन न तो उन्हें खाद मिला और न ही पानी-छाया की उचित व्यवस्था थी।
किसानों को इस समय खाद की गंभीर किल्लत झेलनी पड़ रही है। सरकारी वितरण केंद्रों पर लंबी-लंबी कतारें लगी रहती हैं, जिसमें ज्यादातर महिला व बुजुर्ग किसान इंतज़ार करने को मजबूर हैं। बताया जा रहा है कि भूरियाबाई घंटों धूप में इंतज़ार करती रहीं और अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्होंने दम तोड़ दिया।
ग्रामीणों में इस घटना को लेकर आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि खाद वितरण व्यवस्था सही होती और ज़रूरी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जातीं तो भूरियाबाई की जान बच सकती थी।
अब सवाल ये उठ रहे हैं— आखिर *एग्रीकल्चर और प्रशासन की लापरवाही कब तक गरीब किसानों की जान लेती रहेगी?
खाद वितरण में हो रही अव्यवस्था को कब सुधारा जाएगा?
क्या सरकार इस मौत की जाँच कर दोषियों पर कार्रवाई करेगी?
भूरियाबाई की मौत ने प्रदेश में किसानों की हालत पर फिर एक बार कड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या किसान की तकलीफ़ सुनने वाला कोई है?
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