योगगुरु बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद एक बार फिर चर्चाओं में है। इस बार मामला स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।
देहरादून/पिथौरागढ़
उत्तराखंड के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने पतंजलि और उससे संबंधित दो अन्य कंपनियों पर घटिया एवं मानकों के विपरीत घी बेचने के आरोप में 1.4 लाख रुपये का जुर्माना ठोका है।
यह मामला वर्ष 2020 का है, जब विभाग की टीम ने पिथौरागढ़ जिले के कसनी क्षेत्र में स्थित करण जनरल स्टोर से पतंजलि गाय के घी का सैंपल रूटीन जांच के दौरान लिया था। जांच रिपोर्ट में पाया गया कि यह उत्पाद खाद्य सुरक्षा मानकों पर खरा नहीं उतरा, जिसके बाद यह मामला ट्रिब्यूनल में गया।
सहायक आयुक्त आर.के. शर्मा के मुताबिक—“घी के नमूने में गुणवत्ता संबंधी कमियां पाई गईं, जो उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण हैं। इसलिए विभाग ने नियमानुसार कार्रवाई करते हुए जुर्माने का निर्णय लिया है।
बाजार में बिकने वाले उत्पादों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल…
लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। विज्ञापनों में शुद्धता और गुणवत्ता का दावा करने वाली कंपनियों पर भी अब सवाल उठने लगे हैं —
✔ क्या उपभोक्ता स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है?
✔ क्या ब्रांड की आड़ में बेची जा रही मिलावटी सामग्री?
✔ क्या कार्रवाई के बाद भी बाजार में ऐसे उत्पादों की बिक्री रुकेगी?
पतंजलि पर बढ़ी नजर
पतंजलि पहले भी अपने कई खाद्य एवं औषधीय उत्पादों को लेकर विवादों में रह चुकी है।
इस ताजा कार्रवाई के बाद विभाग ने साफ संकेत दिए हैं कि—“खाद्य सुरक्षा पर समझौता करने वाली किसी भी कंपनी को बख्शा नहीं जाएगा।”
उपभोक्ता सतर्क रहें! खाद्य उत्पाद खरीदते समय
एफएसएसएआई मार्क चेक करें
एक्सपायरी डेट और गुणवत्ता लेबल ध्यान से पढ़ें




