मझौली वन परिक्षेत्र में हरियाली का चीरहरण: अंधाधुंध कटाई, अवैध खनन और कब्जों का बोलबाला, गहरी नींद में जिम्मेदार

अवैध गतिविधियों पर विभागीय संरक्षण के आरोप; सिहोरा रेंजर और मझौली प्रभारियों की भूमिका पर सवाल, डीएफओ व एसडीओ ने दिए जांच और सख्त कार्रवाई के निर्देश

मझौली/जबलपुर:

मझौली वन परिक्षेत्र इन दिनों लकड़ी तस्करों, खनन माफिया और भू-माफियाओं की खुली शरणस्थली में तब्दील होता जा रहा है। परिक्षेत्र की विभिन्न बीटों में हरे-भरे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई, पहाड़ी व नदी-नालों से पत्थर-मुरम का अवैध उत्खनन और बेशकीमती वन भूमि पर खुलेआम अतिक्रमण का खेल बदस्तूर जारी है। हैरान करने वाली बात यह है कि प्राकृतिक संपदा के संरक्षण का दायित्व संभालने वाला मैदानी अमला सब कुछ जानकर भी खामोश बैठा है, जिससे विभागीय सांठगांठ के गंभीर आरोप लग रहे हैं।

बीटों में बेखौफ कुल्हाड़ी और जेसीबी का तांडव

प्रत्यक्षदर्शियों व स्थानीय सूत्रों के अनुसार, परिक्षेत्र की संवेदनशील बीटों में रात के अंधेरे में प्रतिबंधित प्रजातियों के पेड़ों को काटकर सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाया जा रहा है। पेड़ों के कटते ही रिक्त हो रही वन भूमि पर रातों-रात फेंसिंग और अवैध निर्माण खड़े किए जा रहे हैं। वहीं, वन सीमा क्षेत्र के भीतर से मिट्टी, मुरम और पत्थरों का अनियंत्रित खनन कर पर्यावरण के संतुलन को भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

विभागीय सांठगांठ के गंभीर आरोप

स्थानीय ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों का सीधा आरोप है कि मझौली प्रभारी दीपक पटवा एवं उप रेंजर राजेश खरे की कार्यप्रणाली पूरी तरह संदिग्ध है। आरोप है कि सिहोरा रेंजर अजय कुमार मिश्रा के संरक्षण और आपसी तालमेल के चलते मैदानी स्तर पर माफियाओं को खुली छूट मिली हुई है। पूर्व में ग्रामीणों व पर्यावरणप्रेमियों द्वारा कई बार लिखित व मौखिक शिकायतें दर्ज कराई गईं, लेकिन ठोस कार्रवाई करने के बजाय केवल कागजी औपचारिकता निभाकर मामलों को दबा दिया जाता है।

 “मझौली वन परिक्षेत्र में अवैध कटाई, उत्खनन और वन भूमि पर अतिक्रमण की शिकायतें बेहद गंभीर हैं। वन संपदा को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी माफिया को बख्शा नहीं जाएगा। पूरे मामले की विस्तृत और निष्पक्ष जांच के लिए उड़नदस्ता दल गठित किया जा रहा है। यदि जांच में स्थानीय अधिकारियों या बीट प्रभारियों की संलिप्तता अथवा लापरवाही पाई जाती है, तो उनके खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।”

पुनीत सोनकर, डीएफओ (जिला वनमंडलाधिकारी), जबलपुर:

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

Latest News

Stay Connected

0FansLike
30FollowersFollow
0FollowersFollow
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

Most View