कानपुर के अस्पताल पर इलाज में घोर लापरवाही का आरोप, जवान की माँ का काटना पड़ा हाथ

3 दिन तक FIR के लिए भटकता रहा देश का रक्षक; साथी जवान उतरे समर्थन में, तब दर्ज हुआ मामला

कानपुर

देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले एक जवान को जब अपनी ही माँ के इंसाफ के लिए व्यवस्था के सामने बेबस होना पड़े, तो यह पूरे सिस्टम पर बड़ा सवालिया निशान है। आईटीबीपी (ITBP) के जवान विकास सिंह अपनी माँ के साथ हुई कथित मेडिकल लापरवाही के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए 3 दिनों तक थानों के चक्कर काटते रहे, लेकिन खाकी ने अपने ही भाई (वर्दीवाले) की एक न सुनी।

सिस्टम की इस बेरुखी के बाद जब आज आईटीबीपी के जवानों की पूरी बटालियन अपने साथी के समर्थन में कमिश्नर कार्यालय पहुंच गई, तब जाकर प्रशासनिक महकमे की नींद टूटी और मामले में त्वरित कार्रवाई का भरोसा दिया गया।

 क्या है पूरा मामला?

आरोप है कि कानपुर के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान डॉक्टरों और स्टाफ द्वारा घोर लापरवाही बरती गई। इस लापरवाही का अंजाम इतना भयानक रहा कि जवान विकास सिंह की माँ का एक हाथ काटना पड़ गया। पीड़ित परिवार का आरोप है कि अस्पताल की इस गंभीर चूक ने उनकी हँसती-खेलती जिंदगी को संकट में डाल दिया।

देश की सेवा में तैनात जवान विकास सिंह न्याय की उम्मीद में तीन दिनों तक पुलिस अधिकारियों और थानों के चक्कर काटते रहे कि दोषियों के खिलाफ सख्त एफआईआर दर्ज हो। लेकिन कानपुर पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और पीड़ित जवान को केवल टालमटोल का सामना करना पड़ा।

जब न्याय के सारे रास्ते बंद दिखे, तो आईटीबीपी के साथी जवान विकास सिंह के समर्थन में आगे आए। आज जब पूरी बटालियन एकजुट होकर कमिश्नर ऑफिस पहुंची, तो वहां हड़कंप मच गया। देश के रक्षकों को इस तरह सड़क पर देखकर प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। आनन-फानन में अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया और उचित वैधानिक कार्रवाई का आश्वासन दिया।

सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा: इस घटना का वीडियो और जानकारी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। लोग व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं कि *”जो जवान देश की रक्षा के लिए अपनी जान दांव पर लगाता है, क्या उसके परिवार की सुरक्षा और न्याय की जिम्मेदारी इस बहरे सिस्टम की नहीं है?”* यह लड़ाई अब सिर्फ एक जवान की नहीं, बल्कि चिकित्सा और प्रशासनिक लापरवाही से पीड़ित हर आम नागरिक की आवाज बन चुकी है।

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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