ई-विकास प्रणाली’ की अनदेखी पर कलेक्टर की बड़ी कार्रवाई, 2 प्रबंधक सस्पेंड, 12 का कटेगा वेतन

किसानों को पारदर्शी तरीके से खाद उपलब्ध कराने के सरकारी दावों को हवा में उड़ाना कटनी जिले के 14 समिति प्रबंधकों को बेहद भारी पड़ गया है।

कटनी

‘ई-विकास प्रणाली’ को ठेंगा दिखाकर नियम विरुद्ध तरीके से उर्वरक बांटने के मामले में कलेक्टर आशीष तिवारी ने अब तक की सबसे बड़ी और सख्त कार्रवाई की है।

कलेक्टर ने समीक्षा बैठक के दौरान मिली गड़बड़ियों पर तत्काल संज्ञान लेते हुए 2 समिति प्रबंधकों को सस्पेंड कर दिया है, जबकि लापरवाही बरतने वाले 12 अन्य प्रबंधकों के वेतन में 7 दिन की कटौती के आदेश जारी कर दिए हैं। इस ‘डिजिटल स्ट्राइक’ से पूरे सहकारिता विभाग और खाद विक्रेताओं में हड़कंप मच गया है।

कलेक्टर के कड़े रुख के बाद निलंबन और वेतन कटौती के आदेश भी तुरंत प्रभाव से जारी कर दिए गए हैं:

 बाबूजी सेन (समिति प्रबंधक – प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति पैक्स सिनगौड़ी, खितौली एवं उबरा): ई-विकास प्रणाली के क्रियान्वयन में गंभीर लापरवाही और अनुशासनहीनता बरतने पर तत्काल प्रभाव से निलंबित।

 सतीश कुमार निगम (खाद खरीदी प्रभारी व सहायक प्रबंधक – सिनगौड़ी): वर्ष 2025-26 में खाद का भौतिक वितरण तो कर दिया, लेकिन ‘ई-वितरण प्रणाली’ में एंट्री ही नहीं की। शासन के आदेशों की अवहेलना पर इन्हें भी सस्पेंड कर प्रभार से मुक्त कर दिया गया है।

   (नोट: इनके स्थान पर अब खाद प्रभारी का चार्ज प्रमोद निगम और उपार्जन का प्रभार रमाकांत दुबे को सौंपा गया है।)

डिजिटल व्यवस्था में ढिलाई बरतने वाले निम्नलिखित प्रबंधकों के मई 2026 के वेतन से 7 दिवस की कटौती की जाएगी:

 1. नेहा चौरसिया (बैक समिति प्रबंधक, कटनी)

 2. सतीश तिवारी (प्रभारी समिति प्रबंधक, चाका)

 3. प्रमोद कुमार उपाध्याय (बैक समिति प्रबंधक, कन्हवारा)

 4. मनोज द्विवेदी (बैक समिति प्रबंधक – अमाडी, बसाडी, नन्हवाराकला)

 5. देवानंद सिंह रघुवंशी (प्रभारी समिति प्रबंधक, बड़वारा)

 6. राहुल तिवारी (बैक समिति प्रबंधक, विलायतकला)

 7. संतोष दीक्षित (प्रभारी समिति प्रबंधक, चॉदनखेडा)

 8. बाबूजी सेन (बैक समिति प्रबंधक – खितौली, उबरा, सिनगौड़ी)

 9. संतोष दुबे (प्रभारी समिति प्रबंधक, दशरमन)

 10. रबि तिवारी (बैक समिति प्रबंधक, मुरवारी)

 11. सुनील कुमार सोनी (बैक समिति प्रबंधक, रीठी)

कटनी जिले में किसानों को बिना किसी परेशानी और बिचौलियों के खाद मिल सके, इसके लिए 1 अप्रैल से ‘ई-विकास प्रणाली’ लागू की गई है। इसके तहत शत-प्रतिशत खाद की बिक्री ई-विकास टोकन प्रणाली से ही होनी थी।

इसके बावजूद कुछ समितियां पुरानी लीक पर चलते हुए पारंपरिक रूप से पीओएस (POS) मशीन से खाद बांट रही थीं। कलेक्टर ने इस मनमानी और सरकारी आदेश की अनदेखी पर गहन नाराजगी व्यक्त करते हुए यह हंटर चलाया है।

 इस डिजिटल सॉफ्टवेयर में किसान की जमीन (खसरा नंबर) और उसके द्वारा बोई गई फसल का पूरा डेटा फीड रहता है। इसी आधार पर सॉफ्टवेयर खुद तय करता है कि किसान को कितनी खाद की जरूरत है। इससे जरूरत से ज्यादा भंडारण और खाद की कालाबाजारी पर पूरी तरह लगाम लग जाएगी।

 अब किसान घर बैठे ही पोर्टल पर देख सकते हैं कि किस केंद्र पर कितनी खाद बची है। किसान भाई अपनी सुविधा के अनुसार PACS, डबल लॉक केंद्र, निजी विक्रेता, या फिर एमपी ऑनलाइन और सीएससी (CSC) केंद्रों पर जाकर अपना ई-टोकन जनरेट करवा सकते हैं।

कलेक्टर आशीष तिवारी ने जिले के सभी अधिकारियों, सहकारी समितियों और निजी डीलरों को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है:

“अगर अब कोई भी बिना ई-टोकन के खाद बेचता पाया गया, तो उसके खिलाफ केवल विभागीय कार्रवाई नहीं होगी, बल्कि उर्वरक (नियंत्रण) आदेश 1985 के तहत सीधे पुलिस थाने में एफआईआर (FIR) दर्ज कराकर जेल भेजा जाएगा। किसानों के हक में रोड़ा अटकाने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।”

साथ ही, कलेक्टर ने किसानों से भी भावुक अपील की है कि वे अपनी मिट्टी की सेहत का ख्याल रखें और केवल संतुलित मात्रा में ही उर्वरकों का उपयोग करें। अनावश्यक खाद डालने से न केवल खेती की लागत बढ़ती है, बल्कि जमीन की उपजाऊ शक्ति भी नष्ट होती है।

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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