थाली में परोसा जा रहा ‘धीमा ज़हर’: अमानक सामग्रियों और मिलावटखोरी पर फूटा जनआक्रोश, कड़े कानून की उठी मांग

 पशु आहार से लेकर दूषित घटकों के इस्तेमाल की शिकायतों से सहमे उपभोक्ता, सरकार से सख्त दखल की अपील

 * लीवर, किडनी और आंतों को खोखला कर रही मिलावट; विशेषज्ञों ने दी गंभीर स्वास्थ्य संकट की चेतावनी

 * उपभोक्ता मंचों का सवाल—सिर्फ जुर्माने तक क्यों सीमित कार्रवाई? गैर-जमानती धाराओं और फास्ट-ट्रैक कोर्ट की मांग

नई दिल्ली 

रोजमर्रा के भोजन की थाली में शुद्धता की जगह मुनाफे के लिए मिलावट का जहर घुलता जा रहा है। बाजार में बिक रहे विभिन्न खाद्य उत्पादों में अमानक, निम्न स्तरीय, पशु आहार योग्य और दूषित सामग्रियों के कथित इस्तेमाल की लगातार सामने आ रही खबरों ने देशभर में उपभोक्ताओं के भीतर गहरा रोष पैदा कर दिया है। जागरूक नागरिकों और उपभोक्ता संरक्षण संगठनों का स्पष्ट कहना है कि यदि मासूम जिंदगियों से खिलवाड़ करने वाले इस सिंडिकेट पर तुरंत कड़ा कानूनी प्रहार नहीं हुआ, तो आने वाले समय में देश को अभूतपूर्व जनस्वास्थ्य संकट का सामना करना पड़ेगा।

मुनाफे का गंदा खेल: सेहत दांव पर, नियमों का खौफ नदारद

बाजार में शुद्धता के नाम पर बेची जा रही चीजों में जिस तरह की हेराफेरी सामने आ रही है, उसने नियामक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुनाफाखोरों द्वारा खाद्य पदार्थों में ऐसे तत्वों का मिश्रण किया जा रहा है जो सामान्य मानव उपभोग के बिल्कुल भी अनुकूल नहीं हैं। उपभोक्ता मंचों का आरोप है कि मौजूदा कानून और मामूली जुर्माने के प्रावधान इन मिलावटखोरों में कोई खौफ पैदा नहीं कर पा रहे हैं। जब तक ऐसे तत्वों के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में मामले दर्ज कर उनकी संपत्तियां जब्त करने जैसे कठोर कदम नहीं उठाए जाएंगे, तब तक यह जहरीला कारोबार बंद नहीं होगा।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का बड़ा अलर्ट: सीधे अंगों पर असर

वरिष्ठ चिकित्सकों और आहार विशेषज्ञों के अनुसार, अमानक और दूषित खाद्य पदार्थों का लंबे समय तक सेवन शरीर के संवेदनशील अंगों को स्थायी रूप से बर्बाद कर रहा है।

 * अंगों की विफलता: रासायनिक और अखाद्य मिलावट के कारण पेट के गंभीर संक्रमण, लीवर सिरोसिस और किडनी फेलियर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

 * घातक बीमारियां: घटिया तेल, अप्राकृतिक रंग और अमानक तत्वों से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों और हार्मोनल असंतुलन का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।

 * बच्चों पर प्रभाव: छोटे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) पर इसका सीधा और अपरिवर्तनीय दुष्प्रभाव पड़ रहा है।

नागरिक संगठनों और फोरम की प्रमुख मांगें

बढ़ते असंतोष के बीच उपभोक्ता अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्थाओं ने केंद्र व राज्य सरकारों के समक्ष निम्नलिखित मांगें रखी हैं:

 * औचक निरीक्षण व रियल-टाइम सैंपलिंग: एफएसएसएआई (FSSAI) और स्थानीय खाद्य सुरक्षा प्रशासन केवल त्योहारों तक सीमित न रहकर सालभर बड़े स्तर पर फैक्ट्रियों और गोदामों में औचक छापेमारी करे।

 * फास्ट-ट्रैक अदालतों का गठन: खाद्य सुरक्षा से जुड़े मुकदमों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतें बनाई जाएं, ताकि दोषियों को कुछ ही महीनों के भीतर उम्रकैद जैसी सख्त सजा मिल सके।

 * लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द: मानव जीवन को खतरे में डालने वाली कंपनियों और प्रतिष्ठानों के लाइसेंस तुरंत रद्द किए जाएं और उनके मालिकों पर आजीवन प्रतिबंध लगाया जाए।

विभाग की सफाई: चल रही है निगरानी, सतर्क रहें उपभोक्ता

इधर, खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रशासन समय-समय पर गुणवत्ता की जांच के लिए अभियान चलाता है और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर चालानी व विधिक कार्रवाई की जाती है। अधिकारियों ने आम जनता से भी अपील की है कि वे किसी भी उत्पाद को खरीदते समय उसकी पैकेजिंग, बैच नंबर, एक्सपायरी डेट और एफएसएसएआई लाइसेंस अवश्य जांचें। यदि किसी उत्पाद की गुणवत्ता को लेकर संदेह हो, तो विभाग के आधिकारिक पोर्टल और हेल्पलाइन पर तुरंत शिकायत दर्ज कराएं ताकि त्वरित नमूना जांच कराई जा सके।

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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