पंचायत के खातों पर ‘डिजिटल पहरा’: ई-ग्राम स्वराज से घर बैठे खुलेगा विकास कार्यों का कच्चा-चिट्ठा, भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार

 गाँव के बजट, सरकारी ग्रांट और वेंडर भुगतानों का पाई-पाई का हिसाब अब मोबाइल पर सार्वजनिक

* जिओ-टैगिंग से रुकी कागजी सड़कें और नालियां; ग्रामीण खुद बने ‘डिजिटल विजिलेंस ऑफिसर’

नई दिल्ली

गाँव की चौपाल से लेकर सरकारी दफ्तरों तक अब पंचायतों का हिसाब-किताब बंद फाइलों में दफन नहीं रहेगा। केंद्र सरकार की डिजिटल पहल के तहत लागू ‘ई-ग्राम स्वराज’ (e-Gram Swaraj) पोर्टल ने देश भर की ग्राम पंचायतों में वित्तीय पारदर्शिता की एक नई क्रांति ला दी है। वर्षों से चली आ रही इस शिकायत पर अब पूर्ण विराम लग गया है कि ‘गाँव के विकास का पैसा कहाँ आया और कहाँ गया?’ अब एक साधारण स्मार्टफोन यूजर भी अपनी ग्राम पंचायत के स्वीकृत फंड, विकास योजनाओं और हर वाउचर पर हुए वास्तविक भुगतान का ब्योरा सेकंडों में स्क्रीन पर देख सकता है।

बिचौलियों का खेल खत्म, सीधे जनता की नजरों में बजट

अतीत में ग्राम पंचायतों को मिलने वाले केंद्रीय व राज्य वित्त आयोग के अनुदान (Finance Commission Grants) और मनरेगा सहित अन्य योजनाओं की सटीक जानकारी केवल चुनिंदा प्रतिनिधियों और कर्मचारियों तक सीमित रहती थी। सूचना के अभाव में न केवल वित्तीय अनियमितताएं पनपती थीं, बल्कि ग्राम सभाओं में भी विवाद की स्थिति बनती थी।

ई-ग्राम स्वराज पोर्टल ने इस सिंडिकेट को तोड़ दिया है। अब पंचायत का वार्षिक बजट, केंद्रीय अंश, राज्य का आवंटन और ग्राम पंचायत की अपनी आंतरिक आय (Own Source Revenue) पोर्टल पर लाइव दर्ज होती है।

कागजों में नहीं बनेगी सड़क, ‘mActionSoft’ से जिओ-टैगिंग अनिवार्य

सिर्फ खातों का ब्योरा ही नहीं, बल्कि जमीन पर होने वाले निर्माण की गुणवत्ता और वास्तविकता पर भी तकनीकी पहरा बैठा दिया गया है:

 * तस्वीर के साथ जीपीएस लोकेशन: किसी भी निर्माण कार्य (जैसे सीसी रोड, नाली, स्कूल मरम्मत या सामुदायिक भवन) के भुगतान से पहले ‘एम-एक्शन सॉफ्ट’ मोबाइल ऐप के जरिए कार्यस्थल की अक्षांश-देशांतर (Latitude-Longitude) युक्त फोटो अपलोड करनी होती है।

 * तीन चरणों में निगरानी: कार्य शुरू होने से पहले, निर्माण के दौरान और कार्य पूर्ण होने के बाद—इन तीनों चरणों के प्रमाणिक फोटो के बिना अंतिम बिल पास नहीं होता। इसने कागजों पर बनने वाली सड़कों और फर्जी बिलिंग पर पूरी तरह रोक लगा दी है।

पोर्टल पर उपलब्ध मुख्य जानकारियाँ एक नजर में:

| मुख्य खंड | विवरण

| GPDP (विकास योजना) | वित्तीय वर्ष में गांव के लिए तय की गई प्राथमिकताओं और योजनाओं की पूरी सूची |

| वित्तीय आवंटन | 15वें वित्त आयोग व अन्य योजनाओं से प्राप्त कुल फंड और शेष राशि |

| वाउचर वार भुगतान | किस सामग्री के लिए, किस वेंडर/फर्म को, किस चेक या पीएफएमएस खाते से भुगतान हुआ |

| भौतिक प्रगति | कौन सा निर्माण कार्य स्वीकृत हुआ, कितना पूरा हुआ और कितना काम अधूरा है |

ग्रामीण बने विजिलेंस ऑफिसर: ग्राम सभाओं में उठ रहे तथ्यपरक सवाल

egramswaraj.gov.in पोर्टल और इसके मोबाइल एप्लिकेशन ने आम ग्रामीण को अप्रत्याशित शक्ति दी है। अब ग्राम सभा की बैठकों में ग्रामीण हवा-हवाई आरोपों के बजाय पोर्टल से डाउनलोड की गई वाउचर शीट और बिलिंग डिटेल्स लेकर बैठते हैं। इससे जनप्रतिनिधियों और सचिवों की जवाबदेही सीधे जनता के प्रति तय हो रही है। यदि किसी काम में फर्जीवाड़ा दिखता है, तो ग्रामीण सीधे उच्चाधिकारियों को ऑनलाइन प्रमाण सहित शिकायत सौंप रहे हैं।

 “गाँव का पैसा जनता की अमानत है। ई-ग्राम स्वराज ने शासन को बंद कमरों से निकालकर नागरिक की हथेली पर रख दिया है। यह वास्तविक ग्राम स्वराज की दिशा में उठाया गया सबसे मजबूत डिजिटल कदम है।” — पंचायती राज विशेषज्ञ

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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