विशेष शाखा (SB) में पदस्थ वर्ष 2011 बैच के पुलिस आरक्षक (चालक) राकेश गांगले ने संदिग्ध परिस्थितियों में आत्महत्या कर जीवन लीला समाप्त कर ली।
सिंगरौली
कर्तव्यनिष्ठ आरक्षक के इस आत्मघाती कदम से न केवल पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है, बल्कि प्रशासनिक गलियारों में भी हड़कंप की स्थिति है।
सुसाइड नोट में छलका दर्द: “अधिकारियों की अनसुनी से था परेशान”
घटनास्थल से एक भावुक और चौंकाने वाला पत्र (सुसाइड नोट) बरामद हुआ है, जिसमें मृतक आरक्षक का गहरा मानसिक तनाव और सिस्टम के प्रति हताशा साफ झलक रही है। राकेश गांगले ने पत्र में उल्लेख किया था कि वे पारिवारिक व विभागीय समस्याओं को लेकर लंबे समय से मानसिक रूप से व्यथित थे।
उन्होंने भोपाल स्तर पर सीएम हेल्पलाइन (1100) और संबंधित उच्च अधिकारियों तक बार-बार गुहार लगाई, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के चलते उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका। प्रणाली की अनदेखी से तंग आकर उन्होंने अंततः यह घातक कदम उठाया।
सहकर्मियों का बचाव: “स्टाफ का कोई दोष नहीं”
दिलचस्प और भावुक पहलू यह भी रहा कि राकेश गांगले ने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया कि इस आत्मघाती कदम के लिए सिंगरौली में उनके साथ कार्यरत सहकर्मियों या स्टाफ की कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने अपने सहकर्मियों को पूरी तरह निर्दोष बताते हुए मीडिया व समाज से इस व्यवस्थागत नाकामी की ओर ध्यान आकर्षित करने की अंतिम अपील की थी।
पुलिस विभाग में शोक, उच्चस्तरीय जांच के निर्देश
जैसे ही आरक्षक द्वारा आत्महत्या की सूचना मिली, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और फॉरेंसिक टीम तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा तैयार किया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। 2011 बैच के साथी की अचानक इस तरह असमय मौत से पुलिस विभाग में शोक की लहर दौड़ गई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस के आला अधिकारियों ने घटना की निष्पक्ष और विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। सुसाइड नोट को हस्तलेख विशेषज्ञ (Handwriting Expert) के पास जांच के लिए भेजा जा रहा है।
(संपादकीय नोट: स्थानीय पुलिस प्रशासन या एसपी का आधिकारिक बयान/वर्जन प्राप्त होते ही अपडेट शामिल किया जाएगा।)




