अपनी ही मलकियत की ज़मीन पर आशियाना बनाने का सपना जब पाँच सालों तक प्रशासनिक फाइलों और अड़ंगों में उलझा रहे, तो व्यवस्था से उम्मीद टूटना लाजमी है।
जबलपुर
ऐसा ही एक दर्दनाक और आक्रोशित करने वाला मामला जबलपुर कलेक्ट्रेट में सामने आया, जहाँ ग्राम झांसीघाट (छपरा टोला) की पीड़िता शिखा मल्लाह ने कलेक्ट्रेट परिसर में गुहार लगाते हुए आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है।
सरकारी नक्शे की भूल और विपक्षियों की दबंगई
मामला ज़मीन के रकबे और नक्शे में आई तकनीकी त्रुटि से जुड़ा है। शिखा मल्लाह का आरोप है कि सरकारी रिकार्ड में नक्शा गलत कटे होने का नाजायज़ फायदा उठाकर विपक्षी पक्ष लगातार उनके जायज निर्माण कार्य में रोड़े अटका रहा है। विडंबना यह है कि जिस विवादित ज़मीन का हवाला देकर पीड़िता को घर बनाने से रोका जा रहा है, उसी खसरे/स्थान पर विपक्षी लोगों के कई पक्के मकान पहले से सीना ताने खड़े हैं।
‘तहसीलदार से लेकर कलेक्ट्रेट तक…’ सिर्फ मिले आश्वासन
पीड़िता ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि वे पिछले पाँच वर्षों से न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खा रही हैं। हाल ही में शासन के निर्देशानुसार नोटरी करवाकर तमाम वैध दस्तावेज़ तहसीलदार कार्यालय में जमा भी कराए जा चुके हैं। बावजूद इसके, तहसील और राजस्व अमला मामले को ठंडे बस्ते में डाले बैठा है। प्रशासनिक सुस्ती के कारण पीड़िता को मानसिक व आर्थिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है।
न्याय न मिला तो कलेक्ट्रेट में ही डलेगा डेरा
कलेक्ट्रेट पहुँची शिखा मल्लाह ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि यदि ज़िला प्रशासन ने इस गंभीर राजस्व त्रुटि का जल्द निराकरण कर उन्हें निर्माण की अनुमति नहीं दिलाई, तो वे चुप नहीं बैठेंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे न सिर्फ अदालत का दरवाज़ा खटखटाएंगी, बल्कि कलेक्ट्रेट परिसर में ही अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने को विवश होंगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
बड़ा सवाल:
जब एक ही ज़मीन पर विपक्षियों के मकान तने हुए हैं, तो पीड़िता के निर्माण पर ही प्रशासनिक अड़ंगा क्यों? क्या राजस्व विभाग किसी बड़े हादसे या धरने-प्रदर्शन का इंतज़ार कर रहा है




