जीवित रहते बुनियादी हक़ नहीं मिले, अब मरणोपरांत भी सम्मानजनक विदाई नसीब नहीं’

मझौली में प्रशासनिक बेरुखी की हद: खुले में शव जलाने को मजबूर वार्डवासी, श्मशान घाट के शासकीय बोर पर दबंगों का कब्ज़ा

. मझौली/ जबलपुर 

एक तरफ जहाँ प्रदेश सरकार जन-सुनवाई और त्वरित निराकरण के लंबे-चौड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर जबलपुर जिले की नगर परिषद मझौली (वार्ड क्रमांक 1) से प्रशासनिक संवेदनहीनता की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो पूरी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करती है। यहाँ के रहवासी अपनी बुनियादी ज़रूरतों और सम्मानजनक अंतिम संस्कार के अधिकार के लिए दफ़्तरों के चक्कर काटने को विवश हैं।

विगत 17 जून 2026 को वार्डवासियों ने अनुविभागीय/तहसीलदार महोदया को एक विस्तृत आवेदन देकर गुहार लगाई थी। लेकिन हफ़्तों बीत जाने के बाद भी प्रशासनिक अमला नींद से नहीं जागा है और ज़मीनी स्तर पर कोई कार्यवाही नहीं हुई है।

खुले आसमान तले जलती चिताएँ, शासन की संवेदनहीनता पर सवाल

वार्ड क्रमांक 1 के ग्रामीणों का कहना है कि जिस भूमि का उपयोग उनके पूर्वजों के समय से पारंपरिक श्मशान घाट के रूप में होता आ रहा है, वह आज भी बुनियादी सुविधाओं से पूरी तरह वंचित है:

 बारिश और धूप में नारकीय हालात: श्मशान घाट में न तो बाउंड्री वॉल है और न ही कोई श्मशान शेड। बारिश के दिनों में जलती चिताओं को तिरपालों से ढकना पड़ता है या फिर खुले मैदान में गीली लकड़ी और कीचड़ के बीच जैसे-तैसे अंतिम संस्कार करना पड़ता है।

 शासकीय बोर पर निजी कब्ज़ा: श्मशान परिसर में शासन द्वारा जनता के पेयजल हेतु खोदे गए बोर पर कुछ रसूखदार/अज्ञात तत्वों ने अवैध रूप से कब्ज़ा कर रखा है। अंतिम यात्रा में शामिल होने वाले परिजनों और नागरिकों को एक-एक घूंट पानी के लिए तरसना पड़ता है।

 भू-माफियाओं की नज़र और पशुओं का डेरा: बाउंड्री वॉल न होने के कारण यह शासकीय भूमि आवारा मवेशियों का अड्डा बन चुकी है, जिससे आए दिन अतिक्रमण की गंभीर आशंका बनी रहती है।

इंसान जीते-जी तो सुविधाओं के लिए तरस ही रहा है, लेकिन दुःख की बात यह है कि मृत्यु के बाद भी उसे सम्मानजनक विदाई नसीब नहीं हो पा रही। प्रशासन से बार-बार गुहार लगाने के बाद भी कोई सुनने वाला नहीं है।

 पीड़ित वार्डवासी (मझौली)

चकूलाल, अनुसुईयाबाई, चम्मू, गुड्डा, राजा कुशवाहा, लखन, गोपालप्रसाद, मन्नू कुशवाहा, कृष्ण कुमार काछी, सुशील बंशकार, पवन बसोर सहित दर्जनों वार्डवासियों ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि प्रशासन तुरंत निम्नलिखित कदम उठाए:

 1. तत्काल सीमांकन व निर्माण: श्मशान भूमि का शासकीय सीमांकन कर बाउंड्री वॉल एवं पक्के श्मशान शेड का निर्माण स्वीकृत किया जाए।

 2. कब्ज़ा मुक्ति व हैंडपंप: शासकीय बोर को भू-माफियाओं/दबंगों के अवैध कब्ज़े से मुक्त कराकर तुरंत सार्वजनिक हैंडपंप लगाया जाए।

यदि तहसील प्रशासन एवं नगर परिषद मझौली ने जल्द ही इस गंभीर जनसमस्या का संज्ञान लेकर ठोस कदम नहीं उठाए, तो आक्रोशित वार्डवासी शांत नहीं बैठेंगे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि वे तहसील कार्यालय का घेराव करने और उग्र प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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