राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत मझौली ब्लॉक में चल रहा महिला स्व-सहायता समूहों का ढांचा इस वक्त अपने सबसे बड़े संकट से गुजर रहा है।
मझौली जबलपुर
अधिकारी भूमिगत हैं, दफ्तरों पर ताले लटके हैं और फाइलें सील हो रही हैं। ऐसे में सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह खड़ा हो गया है कि आखिर अब इन बेसहारा महिला समूहों की कमान किसके हाथ में है? मझौली की सैकड़ों ग्रामीण महिलाओं की आजीविका का भविष्य अब कौन तय कर रहा है?
इस प्रशासनिक शून्यता और जमीनी हकीकत पर
FIR के बाद दफ्तरों में सन्नाटा, फाइलों पर पहरा
भ्रष्टाचार की पोल खुलते ही पुलिसिया कार्रवाई के डर से आरोपी अधिकारी और उनके करीबी कर्मचारी रफूचक्कर हो चुके हैं। आजीविका मिशन का मझौली कार्यालय इस समय केवल पुलिस और जांच कमेटियों के लिए दस्तावेजों का पुलिंदा बनकर रह गया है। इस अचानक पैदा हुए प्रशासनिक गतिरोध के कारण ब्लॉक स्तर पर योजनाओं का क्रियान्वयन पूरी तरह ठप होने की कगार पर पहुंच गया था, जिससे ग्रामीण महिलाओं में भारी आक्रोश और अनिश्चितता का माहौल था।
इस बड़े संकट को देखते हुए और ग्रामीण महिलाओं के रोजगार को पूरी तरह ध्वस्त होने से बचाने के लिए जिला पंचायत और NRLM के वरिष्ठ अधिकारियों ने आनन-फानन में एकक्षइमरजेंसी डैमेज कंट्रोल प्लान’ तैयार किया है। इसके तहत प्रशासनिक कमान को निम्नलिखित हाथों में सौंपा गया है:
पड़ोसी ब्लॉक के समन्वयकों की एंट्री: जिला परियोजना प्रबंधक (DPM) ने मझौली ब्लॉक का प्रशासनिक प्रभार अस्थाई रूप से नजदीकी ब्लॉक के सीनियर क्लस्टर समन्वयकों (Cluster Coordinators) और जिला स्तर के नोडल अधिकारियों को सौंप दिया है, ताकि फाइलों और भुगतानों का मूवमेंट न रुके।
ग्राउंड स्टाफ सीधे जिला मुख्यालय से अटैच: ब्लॉक स्तर पर तैनात सह-समन्वयकों (Co-ordinators) और मैदानी अमले को कड़े निर्देश देकर गांवों में उतारा गया है। राशन वितरण (MDM), बैंक लिंकेज और कुटीर उद्योगों से जुड़े दैनिक कार्यों को सुचारू रूप से चलाने की सीधी जिम्मेदारी अब इस मैदानी स्टाफ की होगी।
दागी खातों पर ‘फ्रीज’, नई निगरानी समितियां सक्रिय: जिन विशिष्ट महिला समूहों पर भ्रष्टाचार के सीधे आरोप हैं, उनके बैंक खातों को अस्थाई रूप से फ्रीज कर दिया गया है। इन समूहों का काम न रुके, इसके लिए गांव की ही अन्य निष्पक्ष और वरिष्ठ महिलाओं को जोड़कर ‘तदर्थ (अस्थाई) समितियों’ का गठन किया जा रहा है।
रडार पर कई और ‘सफेदपोश’, बढ़ सकता है एफआईआर का दायरा!
जांच से जुड़े उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि यह खेल सिर्फ प्रकाश पांडेय तक सीमित नहीं है। ब्लॉक ऑफिसर के कार्यकाल के दौरान पिछले कुछ वर्षों में बांटे गए बंपर फंड और ऑडिट वाउचर्स की री-ऑडिटिंग शुरू हो गई है। आशंका प्रबल है कि आजीविका मिशन के इस खेल में जिला स्तर के कुछ बड़े चेहरों और स्थानीय बिचौलियों की संलिप्तता भी उजागर होगी। बहुत जल्द इस मामले में सप्लीमेंट्री एफआईआर या नए आरोपियों के नाम सामने आ सकते हैं।
‘पाप करे कोई, भरे कोई’ – संकट में निर्दोष महिलाओं का चूल्हा
इस पूरे घमासान का सबसे काला पहलू यह है कि चंद भ्रष्ट अधिकारियों और स्वार्थी पदाधिकारियों की साठगांठ की सजा मझौली ब्लॉक की उन सैकड़ों गरीब, मेहनतकश महिलाओं को भुगतनी पड़ रही है, जो पूरी ईमानदारी से इन समूहों के जरिए अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही थीं। गांवों में इन समूहों की साख खराब हो रही है और बैंकों से मिलने वाली आगामी मदद पर भी संशय के बादल मंडराने लगे हैं
ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए शुरू की गई राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन जैसी पवित्र योजना को मझौली में भ्रष्टाचार की दीमक चाट गई। दोषियों को पाताल से भी ढूंढकर जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाना चाहिए, इसमें कोई दो राय नहीं है। लेकिन प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि ‘गेहूं के साथ घुन न पिसे’। जांच के नाम पर निर्दोष महिलाओं का मानदेय, उनका रोजगार और राशन वितरण का काम किसी भी कीमत पर रुकना नहीं चाहिए। तंत्र के पाप का खामियाजा गरीब का चूल्हा भुगते, यह कतई स्वीकार्य नहीं है।
विशेष पड़ताल: प्रधान संपादक सुंदर लाल बर्मन
✍️ मझौली दर्पण न्यूज़ ब्यूरो
रिपोर्ट, जबलपुर




