₹10 का पोस्टल ऑर्डर और ₹10,000 की चोट: सूचना छुपाने वाले जबलपुर के खेल अधिकारी नापे गए, बचने के लिए भागे हाईकोर्ट!

मध्यप्रदेश में सूचना का अधिकार (RTI) कानून को अपनी जागीर समझने और तकनीकी कमियों की आड़ में जनता को दौड़ाने वाले नौकरशाहों के दिन अब लदने लगे हैं।

भोपाल

राज्य सूचना आयोग ने एक कड़ा और नजीर बनने वाला फैसला सुनाते हुए जबलपुर के तत्कालीन संभागीय खेल अधिकारी एवं लोक सूचना अधिकारी (PIO) आशीष पांडे पर ₹10,000 का जुर्माना (शास्ति) ठोक दिया है।

आयोग की इस ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ से प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। खुद को फंसता देख उक्त अधिकारी आनन-फानन में जबलपुर हाईकोर्ट की शरण में पहुंचे हैं, लेकिन फिलहाल उन्हें कोई राहत नहीं मिली है।

 खेल विभाग का ‘खेल’ और ₹10 का वह बहाना

यह पूरा मामला साल 2022 का है। आरटीआई एक्टिविस्ट विनय जी. डेविड ने जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश तीरंदाजी अकादमी और जिला खेल एवं युवा कल्याण विभाग से जुड़े कुछ बेहद संवेदनशील दस्तावेजों और जानकारियों की मांग की थी।

आमतौर पर जनता को टरकाने के आदी हो चुके तत्कालीन पीआईओ आशीष पांडे ने एक बेहद अजीब और लचर बहाना बनाया। उन्होंने आवेदन को सिर्फ इसलिए डस्टबिन में डाल दिया क्योंकि ₹10 के पोस्टल ऑर्डर (PO) पर विभाग का नाम सही से नहीं लिखा था। अधिकारी को लगा कि कहानी यहीं खत्म हो गई, लेकिन आवेदक ने हार नहीं मानी और मामला राज्य सूचना आयोग (प्रकरण क्रमांक: ए-592/2023) पहुंच गया।

 आयोग की दोटूक: “अधिकारी की नीयत ही साफ नहीं थी”

राज्य सूचना आयुक्त ओंकार नाथ की पीठ के सामने जब यह मामला आया, तो उन्होंने अधिकारी के बहानों के परखच्चे उड़ा दिए। आयोग ने अपने ऐतिहासिक आदेश में ऑन-रिकॉर्ड कहा:

“तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी आशीष पाण्डेय आवेदन में चाही गई प्रकटन योग्य जानकारी नहीं देना चाहते थे। उनका उद्देश्य जानकारी प्रकटन नहीं करने का था।”

आयोग ने लगाई क्लास:

 जनता अंतर्यामी नहीं है: एक आम नागरिक को नहीं पता होता कि पोस्टल ऑर्डर किस सटीक पदनाम से देय (Payable) होगा। यह बताना और सही करवाना अधिकारी का काम था, आवेदन निरस्त करना नहीं।

 धारा 7 का खुला उल्लंघन: मामूली तकनीकी त्रुटि को आधार बनाकर जानकारी दबाना आरटीआई एक्ट की मूल भावना की हत्या है।

 ₹25,000 की थी तलवार:आयोग ने साफ किया कि अधिकारी के सर्विस रिकॉर्ड को देखते हुए थोड़ी नरमी बरती गई है, वरना कानूनन यह जुर्माना अधिकतम ₹25,000 होना तय था।

आखिर जुर्माना लगते ही हाईकोर्ट क्यों भाग खड़े हुए साहब?

इस फैसले के बाद अधिकारी आशीष पांडे ने तुरंत जबलपुर हाईकोर्ट में रिट पिटीशन (WP) दायर कर दी। प्रशासनिक और कानूनी जानकारों के मुताबिक, अधिकारी की इस छटपटाहट के पीछे तीन बहुत बड़े डर हैं:

 जेब पर सीधी मार: यह जुर्माना सरकारी बजट से नहीं, बल्कि सीधे अधिकारी की निजी सैलरी (वेतन) से कटेगा और “सचिव, राज्य सूचना आयोग, भोपाल” के खाते में जमा होगा।

 करियर पर फुल स्टॉप: दंडात्मक कार्रवाई (Penalty) लगते ही अधिकारी की गोपनीय चरित्रावली (CR) खराब हो जाती है। इसके बाद न तो मनचाहा प्रमोशन मिलता है और न ही मलाईदार पोस्टिंग।

 आदतन’ होने का ठप्पा: इसी अधिकारी के खिलाफ एक और केस (ए-590/2023) में भी सूचना छुपाने का गंभीर आरोप लग चुका है। ऐसे में यह रिकॉर्ड उनके पूरे करियर को गर्त में ले जा सकता है।

“₹10 का कागज, बड़े-बड़ों को कोर्ट के चक्कर लगवा देता है”

इस लंबी लड़ाई को जीतने वाले आरटीआई एक्सपर्ट विनय जी. डेविड का कहना है:

“अफसरों को लगता है कि आम आदमी दफ्तरों के चक्कर काटकर थक जाएगा और घर बैठ जाएगा। लेकिन यह कानून की ताकत है। आरटीआई एक्ट की धारा 23 साफ कहती है कि आयोग के फैसले के खिलाफ आप दीवानी अदालतों में नहीं जा सकते। हाईकोर्ट भी सिर्फ तब हस्तक्षेप करता है जब प्राकृतिक न्याय का मर्डर हुआ हो, जबकि यहाँ आयोग ने पूरी सुनवाई के बाद फैसला दिया है। हम कोर्ट में भी मजबूती से अपना पक्ष रखेंगे।”

सिस्टम के लिए कड़ा सबक

यह मामला उन सभी लोक सूचना अधिकारियों के लिए एक खुली चेतावनी है जो आरटीआई आवेदनों को कचरे का डिब्बा समझते हैं। ₹10 का एक मामूली पोस्टल ऑर्डर आज एक बड़े अधिकारी को कोर्ट-कचहरी के चक्कर कटवा रहा है। यह लोकतंत्र और पारदर्शिता की एक बहुत बड़ी जीत है।

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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