MP में 74 करोड़ का ‘मिलावट’ घोटाला: सरसों तेल के टैंकरों में भरा था 90% पानी, CBI ने दर्ज की FIR; 12 लोग नामजद

मध्य प्रदेश के चंबल अंचल के मुरैना जिले से भ्रष्टाचार और जालसाजी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है

मुरैना/ग्वालियर:

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने मुरैना की मशहूर कंपनी ‘केएस ऑयल्स लिमिटेड’ (KS Oils Ltd.) के तत्कालीन चेयरमैन रमेशचंद्र गर्ग समेत 12 आरोपियों के खिलाफ 74 करोड़ 77 लाख रुपये के कथित सरसों तेल घोटाले में एफआईआर (नियमित केस) दर्ज की है।

जांच में जो सबसे चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, वह यह कि सरकारी निगरानी के बावजूद सरसों के तेल के बड़े-बड़े टैंकों में 90 प्रतिशत से अधिक पानी भरा पाया गया।

10 साल की लंबी जांच के बाद CBI का बड़ा एक्शन

यह घोटाला साल 2010 से 2014 के बीच का है, जिसकी सीबीआई पिछले लगभग 10 सालों से कड़ियां जोड़ रही थी। जांच पूरी होने के बाद अब केंद्रीय एजेंसी ने स्टेट ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन (STC) को करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान पहुंचाने, फर्जीवाड़ा और आपराधिक साजिश रचने के आरोप में औपचारिक मामला दर्ज कर लिया है।

शेल कंपनियों के जरिए पैसे की ‘हेराफेरी’

सीबीआई की जांच में सामने आया कि सरसों तेल की आपूर्ति करने वाली दो कंपनियां— मैसर्स चंबल वैली एग्रो प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और मैसर्स ग्वालियर कमोडिटीज प्राइवेट लिमिटेड— असल में केवल कागज़ी यानी ‘शेल’ कंपनियां थीं

 * इन कंपनियों को पर्दे के पीछे से मुरैना की केएस ऑइल्स का प्रबंधन ही नियंत्रित कर रहा था।

 * स्टेट ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन (STC) ने नियमों को ताक पर रखकर इन कंपनियों के लिए 75 करोड़ की स्वीकृत सीमा के बावजूद 83.30 करोड़ रुपये के लेटर ऑफ क्रेडिट (LC) जारी कर दिए।

 * इस राशि का एक बड़ा हिस्सा गोलमाल करके वापस केएस ऑइल्स के खातों में ही ट्रांसफर कर दिया गया।

 सरसों तेल की जगह टैंकों में मिला 90% पानी!

इस पूरे घोटाले का सबसे हैरान करने वाला पहलू सितंबर 2012 में सामने आया। मुरैना और गुना स्थित जिन टैंकों में सरसों तेल के भंडारण की जिम्मेदारी ‘स्टार एग्री वेयरहाउसिंग एंड कोलेटरल मैनेजमेंट लिमिटेड’ नाम की एजेंसी के पास थी, उसने स्टॉक को पूरी तरह सही प्रमाणित किया था। लेकिन जब मौके पर औचक निरीक्षण (Physical Verification) किया गया, तो टैंकों के भीतर सरसों तेल की जगह 90% से ज्यादा पानी भरा मिला।

 अधिकारियों की मिलीभगत से लगा करोड़ों का चूना

सीबीआई की एफआईआर के मुताबिक, जब केएस ऑइल्स निर्धारित समय पर भुगतान करने और स्टॉक का निपटारा करने में पूरी तरह नाकाम रही, तब सरकारी अधिकारियों को कार्रवाई करनी चाहिए थी। लेकिन नियमों की अनदेखी करते हुए अधिकारियों ने कार्रवाई करने के बजाय कंपनी को और समय दे दिया। नतीजा यह हुआ कि सरकारी खजाने को सीधे 74.77 करोड़ रुपये का भारी-भरकम नुकसान उठाना पड़ा।

सीबीआई अब इस मामले में नामजद 12 आरोपियों और संलिप्त अधिकारियों के खिलाफ शिकंजा कसने की तैयारी में है।

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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