मध्य प्रदेश में श्रमिक कल्याण योजनाओं का लाभ अंतिम छोर पर बैठे मजदूर तक सीधे और बिना किसी बाधा के पहुंचे, इसे लेकर श्रम विभाग पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है।

नवनियुक्त श्रम आयुक्त संदीप जीआर (IAS) ने पदभार संभालते ही जमीनी हकीकत परखने के लिए मैदानी मोर्चा संभाल लिया है।

जबलपुर / भोपाल

उन्होंने साफ कर दिया है कि योजनाओं की फाइलों को दफ्तरों में दबाकर रखने और मजदूरों को चक्कर कटवाने का ढर्रा अब नहीं चलेगा।

श्रम आयुक्त ने विभागीय समीक्षा बैठक में दोटूक निर्देश दिए हैं कि श्रमिकों के पंजीयन (रजिस्ट्रेशन) और हितलाभ वितरण की पूरी प्रक्रिया को बेहद सरल और पारदर्शी बनाया जाए, ताकि अशिक्षित या कम पढ़े-लिखे मजदूरों को भी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।

 जमीनी हकीकत पर पैनी नजर: ‘दफ्तर छोड़ें, फील्ड में उतरें अधिकारी’

श्रम आयुक्त संदीप जीआर ने योजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को कड़े लहजे में हिदायत दी। उन्होंने कहा कि कागजी आंकड़ों से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि धरातल पर श्रमिक कितना संतुष्ट है।

श्रम आयुक्त संदीप जीआर की दोटूक:

श्रमिक देश और प्रदेश के विकास की रीढ़ हैं। उनके पसीने की कमाई और सरकार द्वारा तय की गई सहायता राशि उन तक पहुंचने में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगर किसी पात्र श्रमिक का पंजीयन केवल तकनीकी कमियों या अधिकारियों की लापरवाही के कारण अटका, तो संबंधित पर सख्त कार्रवाई होगी।”

समीक्षा बैठक के दौरान श्रम आयुक्त ने मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर तत्काल काम करने के निर्देश दिए हैं:

| क्र. सं. | प्रमुख निर्देश | उद्देश्य और प्रभाव

पंजीयन प्रक्रिया का सरलीकरण | पोर्टल और फॉर्म को इतना आसान बनाया जाएगा कि मजदूर खुद या नजदीकी केंद्र से बिना किसी बिचौलिए के रजिस्ट्रेशन करा सकें। |

हितलाभ वितरण में तेजी (DBT) विवाह सहायता, प्रसूति सहायता, शिक्षा और मृत्यु सहायता जैसी योजनाओं का पैसा सीधे ‘सिंगल क्लिक’ से बैंक खातों में जाएगा। |

|लंबित मामलों का निपटारा महीनों से अटके पड़े आवेदनों के लिए विशेष कैंप लगाकर तय समय-सीमा (Time-limit) के भीतर निराकरण किया जाएगा। |

बिचौलियों का खेल होगा खत्म, ‘ई-श्रम’ और ‘संबल’ पर फोकस

आईएएस संदीप जीआर ने निर्देश दिए हैं कि संबल योजना और ई-श्रम पोर्टल के तहत पंजीकृत श्रमिकों का डेटा पूरी तरह पारदर्शी होना चाहिए। पंजीयन के नाम पर श्रमिकों से अवैध वसूली या दलाली की शिकायतों पर उन्होंने शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance) की नीति अपनाने को कहा है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे स्वयं निर्माण साइटों, कारखानों और श्रमिक बस्तियों का दौरा कर व्यवस्थाएं परखें।

 तगड़ा इम्पैक्ट: क्यों खास है संदीप जीआर का यह रुख?

प्रशासनिक हलकों में संदीप जीआर को अपनी कड़क कार्यशैली और ‘रिजल्ट-ओरिएंटेड’ अप्रोच के लिए जाना जाता है। उनके इस औचक रुख से श्रम विभाग के सुस्त पड़े अमले में खलबली मच गई है। इस कड़े कदम से प्रदेश के लाखों असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, जो अक्सर अपनी ही सहायता राशि पाने के लिए बाबूराज और लालफीताशाही का शिकार हो जाते थे।

अब देखना होगा कि कमिशनर के इन कड़े निर्देशों के बाद मैदानी अमला कितनी तेजी से योजनाओं को जमीन पर उतारता है।

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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