सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) मझौली इन दिनों अपनी अव्यवस्थाओं और डॉक्टरों के तानाशाही पूर्ण रवैये के कारण सुर्खियों में है।
मझौली/जबलपुर (मध्य प्रदेश):
यहाँ आने वाले मरीजों को इलाज मिलना तो दूर, उन्हें अपमानित होकर वापस लौटना पड़ रहा है। ताजा मामला वार्ड नंबर 6 के निवासी गेंदालाल चौधरी के साथ सामने आया है, जिन्हें डॉक्टर द्वारा इलाज के बजाय लताड़ लगाकर भगा दिया गया।
सुबह 9 बजे से कतार में थे बुजुर्ग, मिला अपमान
मिली जानकारी के अनुसार, गेंदालाल चौधरी अपनी बीमारी के इलाज के लिए सुबह 9 बजे से ही अस्पताल की लंबी कतार में खड़े थे। घंटों इंतजार के बाद जब उनकी बारी आई, तो ड्यूटी पर तैनात डॉ. दीपक गायकवाड़ ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। बताया जा रहा है कि डॉक्टर ने उनकी समस्या सुनने के बजाय उन्हें बुरी तरह फटकार लगाई और अस्पताल से बाहर जाने को कह दिया।
मीडिया को देखते ही बिगड़े बोल: ‘शासकीय कार्य में बाधा’ की दी धमकी
जब इस घटना की सूचना पाकर स्थानीय मीडियाकर्मी अस्पताल पहुंचे और मरीज की समस्या को लेकर सवाल किए, तो डॉ. गायकवाड़ अपना आपा खो बैठे। उन्होंने मीडियाकर्मियों को जवाब देने के बजाय उनके विरुद्ध “शासकीय कार्य में बाधा डालने” की रिपोर्ट दर्ज कराने की धमकी दे डाली।
“अस्पताल में न तो डॉक्टर समय पर उपलब्ध रहते हैं और न ही मरीजों को उचित सम्मान मिलता है। जब हम अपनी आवाज उठाते हैं, तो हमें ही पुलिस और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाया जाता है।” — स्थानीय निवासी वार्ड नंबर 6 निवासी गैदा लाल चौधरी
अस्पताल की मुख्य समस्याएं: एक नजर में
| समस्या | विवरण |डॉक्टरों की अनुपस्थिति | सुबह ओपीडी के समय पर डॉक्टरों का अपनी सीट पर न होना। अमर्यादित व्यवहार | गरीब और बुजुर्ग मरीजों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग। सुविधाओं का अभाव | घंटों लाइन में लगने के बाद भी बिना परामर्श के मरीजों का लौटना पारदर्शिता की कमी | मीडिया या जनता द्वारा सवाल पूछने पर धमकियां देना। |
मझौली के नागरिकों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब डॉ. दीपक गायकवाड़ या अन्य स्टाफ का ऐसा व्यवहार सामने आया हो। अस्पताल में डॉक्टरों की “तानाशाही” चरम पर है। जनता ने जिला प्रशासन और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) से मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और दोषी डॉक्टर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि आम जन को भयमुक्त और सुलभ इलाज मिल सके।