क्षेत्र में अवैध क्लीनिकों का जाल इस कदर फैल चुका है कि यहां ‘डिग्री किसी की और इलाज किसी का’ खतरनाक खेल खुलेआम चल रहा है।
मझोली/ जबलपुर
आयुर्वेद और होम्योपैथी की डिग्री की आड़ में कई डॉक्टर एलोपैथी का जटिल उपचार कर रहे हैं, जिससे मरीजों की जान पर सीधा खतरा मंडरा रहा है।
इतना ही नहीं, इन अवैध क्लीनिकों में बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट के नियमों की भी खुलेआम अनदेखी की जा रही है, जिससे संक्रमण और गंभीर बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है।
CMHO के आदेश बेअसर, बिना रजिस्ट्रेशन चल रहे क्लीनिक
हैरानी की बात यह है कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) जबलपुर के सख्त निर्देशों के बावजूद मझौली में कई क्लीनिक बिना किसी वैध रजिस्ट्रेशन के संचालित हो रहे हैं।
न क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत पंजीयन
न प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की NOC
न ही उपचार के लिए वैध अनुमति
इसके बावजूद ये संस्थान बेखौफ होकर मरीजों का इलाज कर रहे हैं।
बुधवार को ब्लॉक टास्क फोर्स ने बचैया रोड और सिहोरा रोड पर संयुक्त टीम के साथ सघन छापेमारी की।
टीम में शामिल रहे:स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी राजस्व विभाग के पटवारी
भारी पुलिस बल अभियान के दौरान किसी भी विरोध से निपटने के लिए पूरी तैयारी की गई थी।
दंत चिकित्सा केंद्र सील
सिहोरा रोड पर बिना वैध दस्तावेजों के संचालित एक दंत चिकित्सा केंद्र को मौके पर ही सील कर दिया गया।
बचैया रोड पर जांच
डॉ. ए. विश्वास, सुभाष सराफ और कमलेश श्रीवास के क्लीनिकों की जांच की गई।
वैध प्रमाण पत्र न मिलने पर कड़ी फटकार
अंतिम चेतावनी के साथ कार्रवाई की फाइल तैयार
डायग्नोस्टिक सेंटर की जांच
सिहोरा रोड स्थित आदर्श डिजिटल एक्स-रे एवं डायग्नोस्टिक सेंटर के दस्तावेजों की भी गहन जांच की गई।
विशेषज्ञों के अनुसार बिना प्रशिक्षित डॉक्टरों द्वारा एलोपैथी इलाज करना न केवल गैरकानूनी है, बल्कि यह सीधे तौर पर मरीजों की जान से खिलवाड़ है।
गलत इलाज से गंभीर दुष्प्रभाव का खतरा
संक्रमण फैलने की आशंका
आपात स्थिति में इलाज की कोई गारंटी नहीं
सीधे होगी FIR: डॉ. दीपक गायकवाड़ (CBMO)
कार्रवाई के दौरान CBMO डॉ. दीपक गायकवाड़ ने कड़े शब्दों में कहा—”जनता की सेहत से खिलवाड़ करने वाले किसी भी संस्थान को बख्शा नहीं जाएगा। यह ब्लॉक टास्क फोर्स का निरंतर चलने वाला अभियान है। यदि अगली बार बिना वैध दस्तावेजों के कोई संस्थान मिला, तो केवल चेतावनी नहीं बल्कि सीधे FIR दर्ज कराकर जेल भेजा जाएगा।”
प्रशासन की इस कार्रवाई से निश्चित ही जनता ने राहत की सांस ली है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि ये अवैध क्लीनिक इतने दिनों से किसकी शह पर ‘मौत का खेल’ खेल रहे थे? क्या ये झोलाछाप डॉक्टर स्थानीय रसूखदारों के संरक्षण में फल-फूल रहे हैं?
लगातार हो रही शिकायतों के बाद प्रशासन हरकत में तो आया है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि:
❓ क्या यह अभियान स्थायी रूप ले पाएगा?
❓ क्या सभी अवैध क्लीनिकों पर पूरी तरह ताला लगेगा?
❓ या फिर कुछ दिनों बाद फिर वही हालात लौट आएंगे?




