मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले से मानवता और मर्यादा को शर्मसार करने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है।
छतरपुर (मध्य प्रदेश) |
जिस एंबुलेंस को मरीज अस्पताल पहुँचाने के लिए ‘जीवनदायिनी’ माना जाता है, उसे कुछ रसूखदारों और मनचलों ने अपनी अय्याशी का अड्डा बना लिया।
क्या है पूरा मामला?
छतरपुर की सड़कों पर दौड़ रही एक एंबुलेंस की खिड़की से जब राहगीरों ने ‘अश्लील हरकतें’ होते देखीं, तो उनके होश उड़ गए। एंबुलेंस के अंदर एक लड़की और दो लड़के आपत्तिजनक स्थिति में थे। राहगीरों ने जब यह नजारा देखा, तो तुरंत उसका पीछा करना शुरू किया।
5 किलोमीटर तक पीछा, फिर हुआ ‘ऑन द स्पॉट’ फैसला
खुद को घिरता देख एंबुलेंस चालक ने गाड़ी भगाने की कोशिश की, लेकिन जागरूक लोगों ने हार नहीं मानी। तकरीबन **5 किलोमीटर तक फिल्मी स्टाइल में पीछा** करने के बाद लोगों ने एंबुलेंस को घेराबंदी कर रुकवा लिया। गाड़ी रुकते ही अंदर मौजूद एक युवती और दो युवकों को लोगों ने रंगे हाथ पकड़ लिया।
सत्ता और व्यवस्था पर सवाल (अखिलेश यादव का तंज)
इस घटना ने न केवल प्रशासन बल्कि स्वास्थ्य विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले को लेकर उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव जी ने भी संज्ञान लिया है (या उनके संदर्भ में चर्चा तेज है), जो व्यवस्था के इस पतन पर चिंता जताता है। सवाल यह है कि आखिर सरकारी या निजी एंबुलेंस का दुरुपयोग इस कदर कैसे हो रहा है?
मझौली दर्पण न्यूज नेटवर्क इस घटना की कड़ी निंदा करता है। यह केवल एक अश्लील कृत्य नहीं, बल्कि उस भरोसे का कत्ल है जो एक आम आदमी एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवा पर करता है। प्रशासन को चाहिए कि ऐसी गाड़ियों के परमिट निरस्त किए जाएं और दोषियों पर कठोरतम कार्यवाही हो




