मध्य प्रदेश के दमोह जिले के बटियागढ़ ब्लॉक में शनिवार को ‘संयुक्त मोर्चा’ के आह्वान पर शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर उग्र धरना-प्रदर्शन किया।
बटियागढ़ (दमोह) | गनेश रैकवार
प्रदेश सरकार द्वारा उम्रदराज शिक्षकों के लिए अनिवार्य की गई शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के विरोध में सैकड़ों की संख्या में शिक्षक सड़कों पर उतरे और तहसीलदार योगेंद्र चौधरी को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा
संयुक्त मोर्चा के मीडिया प्रभारी और कर्मचारी नेता **डीसी बेन** ने प्रदर्शन के दौरान बताया कि स्कूल शिक्षा विभाग (DPI) ने आरटीई (RTE) 2009 की धारा 23 का हवाला देकर पुराने शिक्षकों के लिए टेट परीक्षा अनिवार्य कर दी है।
नियमों का उल्लंघन: शिक्षकों का कहना है कि उनकी भर्ती मध्य प्रदेश शासन के पूर्व नियमों के तहत हुई थी, जिसमें बाद में इस तरह के संशोधन का कोई प्रावधान नहीं है।
नौकरी पर संकट: विभाग के नए आदेश के अनुसार, इस परीक्षा में शामिल न होने वाले शिक्षकों की नौकरी जा सकती है, जिससे प्रदेश भर के शिक्षकों में भय और आक्रोश व्याप्त है।
वरिष्ठता की अनदेखी:शिक्षक लंबे समय से प्रथम नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता और पुरानी पेंशन (OPS) की मांग कर रहे थे, लेकिन अब उन्हें अपनी बची हुई नौकरी बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
यह प्रदर्शन प्रदेश व्यापी आंदोलन के द्वितीय चरण का हिस्सा है। शिक्षकों का स्पष्ट कहना है कि सेवा शर्तों में इस तरह का बदलाव नियम विरुद्ध है। इसी के विरोध में पूरे मध्य प्रदेश के ब्लॉक मुख्यालयों पर सांकेतिक धरना-प्रदर्शन किया जा रहा है।
बटियागढ़ में आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिला और पुरुष शिक्षकों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से निम्नलिखित सदस्य उपस्थित रहे:
नेतृत्व: प्राचार्य अर्जुन पटेल, ब्लॉक अध्यक्ष प्रहलाद सिंह, शैलेंद्र सिंह राजपूत।
प्रमुख सदस्य: अरविंद चौरसिया ठाकुर, भगवत सिंह, विजय पटेल, अखिलेश तिवारी, केशव सिंह ठाकुर, रविंद्र राजपूत।
महिला शक्ति: सीमा जैन, ऊषा शुक्ला, भारती ठाकुर, निधि ठाकुर, मेनका प्रजापति सहित भारी संख्या में शिक्षिकाएं।
“हम अपनी सेवा शर्तें बदलने नहीं देंगे। जिस नियम के तहत हमारी भर्ती हुई थी, सरकार को उसी का सम्मान करना चाहिए।” — *प्रदर्शनकारी शिक्षक




