सरकारी आदेश का हवाला देकर स्कूल गेट पर चस्पा किया नोटिस; गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों में भारी निराशा
मझौली (जबलपुर):
बेहतर शिक्षा और आधुनिक सुविधाओं की उम्मीद में जो अभिभावक अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों से निकालकर शासकीय सांदीपनि विद्यालय (सीएम राइज) में प्रवेश दिलाने का सपना देख रहे थे, उन्हें बड़ा झटका लगा है। स्कूल प्रबंधन द्वारा जारी एक नए फरमान ने सैकड़ों अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है।
सांदीपनि विद्यालय मझौली के मुख्य गेट और नोटिस बोर्ड पर एक लिखित आदेश चस्पा किया गया है। इस आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि शासन के निर्देशानुसार, इस सत्र में निजी (प्राइवेट) विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को सांदीपनि विद्यालय में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।”
इस आदेश के सार्वजनिक होते ही स्कूल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल है। कई अभिभावक जो टीसी (Transfer Certificate) लेकर प्रवेश के लिए पहुंचे थे, उन्हें खाली हाथ वापस लौटना पड़ा।
स्थानीय लोगों और शिक्षाविदों का मानना है कि इस आदेश का सीधा फायदा निजी स्कूलों को मिलेगा। सीएम राइज योजना के तहत सांदीपनि विद्यालय में मिल रही उच्च स्तरीय शिक्षा की चर्चा सुनकर बड़ी संख्या में लोग अपने बच्चों का नाम प्राइवेट स्कूलों से कटवा रहे थे। अब इस पाबंदी के बाद, अभिभावकों के पास मजबूरी में महंगे प्राइवेट स्कूलों में ही बच्चों को पढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
एक ओर सरकार ‘सबको शिक्षा, अच्छी शिक्षा’ का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर इस तरह के प्रतिबंधात्मक आदेशों ने गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को मझधार में छोड़ दिया है। अभिभावकों का सवाल है कि— “यह कैसा सरकारी आदेश है जो शिक्षा के समान अवसर छीन रहा है? क्या आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति को अपने बच्चे का स्कूल बदलने का अधिकार नहीं है?”
जब इस संबंध में स्कूल प्रबंधन से चर्चा की गई, तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यह निर्णय स्थानीय स्तर पर नहीं लिया गया है। प्रबंधन का कहना है कि— “वरिष्ठ कार्यालयों से ही यह स्पष्ट निर्देश प्राप्त हुए हैं कि प्राइवेट स्कूलों में पढ़ रहे छात्रों को इस सत्र में प्रवेश न दिया जाए। हम केवल सरकारी आदेशों का पालन कर रहे हैं।”
ब्यूरो रिपोर्ट: मझौली दर्पण न्यूज़




