अधूरी जानकारी, गायब रिकॉर्ड और अपात्र लाभार्थियों की आशंका
मझौली (जबलपुर)
प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत गरीबों को पक्का मकान देने की मंशा पर अब मझौली क्षेत्र में गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सूचना का अधिकार (RTI) के माध्यम से सामने आई जानकारी ने इस योजना के क्रियान्वयन पर संदेह की स्थिति पैदा कर दी है।
मामले में आरोप है कि नगर परिषद मझौली द्वारा मांगी गई जानकारी अधूरी, अस्पष्ट और भ्रामक दी गई, जबकि कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जैसे पटवारी प्रतिवेदन, खसरा-खतौनी और वार्डवार विवरण उपलब्ध ही नहीं कराए गए। इससे यह आशंका गहराने लगी है कि योजना के तहत अपात्र या फर्जी लाभार्थियों को लाभ पहुंचाया गया हो सकता है।
RTI में क्या खुलासा हुआ?
RTI आवेदक द्वारा वर्ष 2018 से 2022 के बीच स्वीकृत आवासों की जानकारी मांगी गई थी।
लेकिन जो जानकारी मिली, उसमें—कई लाभार्थियों के पूर्ण पते और वार्ड क्रमांक का अभाव भू-अभिलेख (खसरा/B1) का अभाव पटवारी की सत्यापन रिपोर्ट उपलब्ध नहीं रिकॉर्ड में स्पष्टता और पारदर्शिता की कमी इन तथ्यों ने पूरे मामले को संदिग्ध बना दिया है।
बढ़ती शंका: फर्जी लाभार्थी और मिलीभगत?
जानकारों का मानना है कि यदि रिकॉर्ड सही तरीके से उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि गंभीर अनियमितता या संभावित घोटाले की ओर संकेत करता है।
संभावना जताई जा रही है कि—ऐसे लोगों को आवास दिया गया, जो पात्र नहीं थे
जिनके पास पहले से जमीन या पक्का मकान था
पटवारी और नगर परिषद स्तर पर जांच में ढिलाई या मिलीभगत हुई
मामला पहुंचा राज्य सूचना आयोग
अपूर्ण जानकारी मिलने के बाद आवेदक को प्रथम अपील और फिर द्वितीय अपील का सहारा लेना पड़ा।अब यह पूरा मामला राज्य सूचना आयोग, भोपाल में विचाराधीन है।
आयोग द्वारा संबंधित विभाग से जवाब तलब किया गया है, जिससे आने वाले समय में इस मामले में बड़ा खुलासा संभव माना जा रहा है।
स्थानीय नागरिकों में इस मामले को लेकर भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि—“अगर गरीबों के हक का घर किसी और को दिया गया है, तो यह न सिर्फ भ्रष्टाचार है बल्कि सामाजिक अन्याय भी है।”
लोगों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
PM आवास योजना जैसी महत्वपूर्ण योजना में यदि इस तरह की अनियमितताएं सामने आती हैं, तो यह पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है।
अब सबकी निगाहें राज्य सूचना आयोग की कार्यवाही पर टिकी हैं—क्या सच्चाई सामने आएगी?
क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी?
मझौली में “PM आवास घोटाला?” अब एक बड़ा जनहित का मुद्दा बनता जा रहा है




