माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर ने सरकार को दिया ‘अंतिम अवसर’—राज्यभर में हलचल
जबलपुर/भोपाल
मध्यप्रदेश के हजारों **ग्राम रोजगार सहायकों (GRS) के भविष्य से जुड़ा मामला अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। माननीय उच्च न्यायालय, जबलपुर ने सरकार को कड़ा रुख दिखाते हुए अंतिम अवसर (Last Opportunity) प्रदान किया है, जिससे पूरे प्रदेश में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है।
क्या है पूरा मामला?
ग्राम रोजगार सहायक, जो मनरेगा (MGNREGA) सहित ग्रामीण विकास योजनाओं की रीढ़ माने जाते हैं, लंबे समय से नियमितीकरण, सेवा सुरक्षा, मानदेय वृद्धि और स्थायी नियुक्ति जैसी मांगों को लेकर संघर्षरत हैं।
सूत्रों के अनुसार, इन मांगों से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि सरकार द्वारा अपेक्षित स्पष्ट जवाब और ठोस कार्यवाही नहीं की गई, जिस पर अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए अंतिम मौका दिया
हाईकोर्ट ने संकेत दिए हैं कि: सरकार अब **टालमटोल नहीं कर सकती तय समयसीमा में **स्पष्ट और ठोस जवाब देना अनिवार्य होगा
अगली सुनवाई में निर्णायक आदेश (Final Order) आ सकता है
कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि सरकार संतोषजनक जवाब नहीं देती, तो कोर्ट सीधे हस्तक्षेप कर सकती है जिससे बड़ा प्रशासनिक बदलाव संभव है।
मझौली, सिहोरा, शहपुरा सहित ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत ग्राम रोजगार सहायकों के बीच इस खबर से उम्मीद और बेचैनी दोनों बढ़ गई हैं।
स्थानीय स्तर पर: कई सहायकों को **समय पर मानदेय नहीं मिल रहा कार्यभार अधिक, लेकिन सेवा सुरक्षा नहीं योजनाओं का दबाव, पर अधिकार सीमित
एक ग्राम रोजगार सहायक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया— “हम सालों से काम कर रहे हैं, लेकिन न नौकरी की गारंटी है, न भविष्य सुरक्षित। अब कोर्ट से ही उम्मीद है।”
अब सरकार के सामने तीन अहम सवाल खड़े हैं:
क्या GRS को स्थायी दर्जा मिलेगा?
क्या मानदेय और सेवा शर्तों में सुधार होगा?
*क्या ग्रामीण योजनाओं का संचालन करने वाले कर्मचारियों को न्याय मिलेगा?
इस मामले की अगली सुनवाई अब बेहद अहम मानी जा रही है।
👉 यदि सरकार संतोषजनक जवाब नहीं देती, तो कोर्ट का फैसला हजारों कर्मचारियों के भविष्य को तय करेगा।
मझौली दर्पण न्यूज़ का सवाल
“गांवों की योजनाएं चलाने वाले ही अगर असुरक्षित हैं, तो विकास की गारंटी कौन देगा?”




