एक तरफ जहाँ जबलपुर स्वास्थ्य विभाग 4 करोड़ रुपये के कथित वाहन घोटाले और तत्कालीन CMHO संजय मिश्रा के निलंबन की आग में झुलस रहा है, वहीं दूसरी ओर विभाग के भीतर पारदर्शिता को लेकर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।
जबलपुर/मझौली।
मझौली निवासी आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा मांगी गई 11 वर्षों के वाहन टेंडर और भुगतान की जानकारी पर CMHO कार्यालय ने एक ऐसा जवाब दिया है, जिसे ‘सूचना रोकने की तकनीक’ के रूप में देखा जा रहा है।
RTI में पूछे गए थे 10 तीखे सवाल
आवेदक शिवम साहू (मझौली दर्पण न्यूज) ने 16 मार्च 2026 को एक आरटीआई लगाकर वर्ष 2015 से 2026 तक मझौली, सिहोरा, पाटन सहित कई विकासखंडों में हुए वाहन टेंडरों का कच्चा चिट्ठा मांगा था। आवेदन में स्पष्ट पूछा गया था कि: टेंडर अवधि समाप्त होने के बावजूद किस अधिकारी के आदेश पर करोड़ों का भुगतान हुआ?
कितने निजी वाहनों का उपयोग शासकीय कार्यों में दिखाकर सरकारी खजाने को चूना लगाया गया?
2015 के बाद नया टेंडर क्यों नहीं किया गया और इसके लिए कौन जिम्मेदार है?
विभाग का तर्क: ‘एक आवेदन, एक विषय’ का नियम
जवाब में CMHO कार्यालय ने पत्र क्रमांक 3511 (दिनांक 26/03/2026) के माध्यम से सूचना देने के बजाय तकनीकी पेंच फंसा दिया। विभाग ने सामान्य प्रशासन विभाग के 2010 के एक ज्ञापन का हवाला देते हुए कहा कि:
“आवेदक ने एक ही आवेदन में भिन्न-भिन्न विषयों और प्रश्नात्मक व वृहत स्वरूप की जानकारी मांगी है। अतः एक ही विषय में जानकारी पुनः मांगें।”
बड़ा सवाल: क्या यह जानकारी दबाने की कोशिश है?
विभागीय सूत्रों और जानकारों का कहना है कि जब मामला पहले से ही घोटाले की जांच (4 करोड़ के गबन) के दायरे में है, तो विभाग को स्व-प्रेरणा से यह जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए थी।
एक ही विषय: आवेदक का पूरा आवेदन केवल ‘वाहन टेंडर और उससे जुड़ी अनियमितता’ पर केंद्रित है। इसे ‘भिन्न विषय’ बताकर खारिज करना विभाग की मंशा पर शक पैदा करता है।
समय का खेल: 16 मार्च को दिए आवेदन पर 26 मार्च को जवाब देकर विभाग ने औपचारिकता तो पूरी की, लेकिन जांच को प्रभावित करने वाले मुख्य दस्तावेजों (लॉगबुक, बिल, नोटशीट) को सामने लाने से बचता नजर आया।
जांच की आंच से बचने का प्रयास!
हाल ही में हुए CMHO के निलंबन के बाद यह माना जा रहा था कि नई व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी, लेकिन RTI पर मिला यह जवाब संकेत दे रहा है कि ‘सिंडिकेट’ के तार अभी भी विभाग में गहरे जुड़े हैं। आवेदक शिवम साहू ने अब इस मामले को लेकर राज्य सूचना आयोग (भोपाल) में प्रथम अपील करने की तैयारी कर ली है।
“जब घोटाला एक ही मद (वाहन) में हुआ है, तो उसे अलग-अलग विषय बताना हास्यास्पद है। यह सीधे तौर पर दोषियों को बचाने और भ्रष्टाचार के सबूत छिपाने की कोशिश है।”
मझौली दर्पण न्यूज




