संसद में गूँजा ‘डिजिटल जासूसी’ का मुद्दा: चीनी कैमरों और AI पर सरकार की चुप्पी से खड़े हुए गंभीर सवाल

भारत की डिजिटल सरहदों पर मंडराते खतरे और डेटा गोपनीयता (Data Privacy) को लेकर संसद में जोरदार बहस छिड़ गई है।

नई दिल्ली

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा चीनी CCTV कैमरों, बदले नाम से लौट रहे प्रतिबंधित ऐप्स और विदेशी AI प्लेटफॉर्म्स पर दिए गए ‘अस्पष्ट’ जवाबों ने देश की सुरक्षा पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

 रक्षक ही बन रहे खतरा? सरकारी दफ्तरों में अब भी ‘चीनी नजर’

सरकार ने सार्वजनिक स्थानों पर चीनी कैमरों पर प्रतिबंध तो लगा दिया, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकारी इमारतों के अंदर लगे लाखों पुराने कैमरे हटा दिए गए हैं? 5 साल पहले खुद सरकार ने माना था कि देश में करीब 10 लाख चीनी कैमरे सक्रिय हैं, जो डेटा लीक कर सकते हैं। मंत्रालय ने अब तक यह साफ नहीं किया है कि इनका Security Audit हुआ है या नहीं।

 ‘गिरगिट’ की तरह रंग बदलकर लौट रहे प्रतिबंधित ऐप्स

टिकटॉक और अन्य ऐप्स पर बैन के बावजूद, कई चीनी कंपनियां नए नामों और विदेशी निवेश के मुखौटे के साथ भारतीय बाजार में दोबारा घुसपैठ कर रही हैं। संसद में जब इन ऐप्स के नाम और उन पर हुई कार्रवाई का विवरण मांगा गया, तो मंत्रालय के पास कोई ठोस डेटा नहीं था।

विदेशी AI और सरकारी डेटा: कितना सुरक्षित है भारत?

आज के दौर में सरकारी डेटा का प्रोसेस होना बेहद संवेदनशील है। विपक्ष का आरोप है कि सरकारी कामकाज में इस्तेमाल होने वाले विदेशी AI प्लेटफॉर्म्स की सुरक्षा और प्रमाणिकता पर सरकार के पास कोई स्पष्ट नीति नहीं है।

“क्या देश को जानबूझकर अंधेरे में रखा जा रहा है? बिना नाम और संख्या बताए गोल-मोल जवाब देना नागरिकों की सुरक्षा से खिलवाड़ है।” — विपक्ष का तीखा हमला

न्यूज़ विश्लेषण: सवाल जो जवाब मांगते हैं

| मुख्य चिंता | वर्तमान स्थिति | सरकार का रुख |

चीनी CCTV | करीब 10 लाख कैमरों का जोखिम | ऑडिट पर कोई स्पष्ट डेटा नहीं |

प्रतिबंधित ऐप्स | नए नाम से दोबारा सक्रिय | कार्रवाई का विवरण अधूरा |

AI प्लेटफॉर्म | विदेशी सर्वर्स पर डेटा प्रोसेसिंग | सुरक्षा प्रमाणन पर चुप्पी |

एक तरफ हम ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘डिजिटल इंडिया’ की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर विदेशी हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर पर हमारी निर्भरता और उस पर पारदर्शिता की कमी एक बड़े खतरे की ओर इशारा कर रही है। क्या सरकार इन मुद्दों पर श्वेत पत्र जारी करेगी या सुरक्षा के नाम पर केवल ‘चुप्पी’ ही मिलेगी?

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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