मध्य प्रदेश में प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को सुदृढ़ करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है।
भोपाल
लंबे समय से रिक्त चल रहे सूचना आयुक्तों के पदों पर अंततः नियुक्तियां कर दी गई हैं। सरकार ने राजेश भट्ट और आलोक नागर को नए राज्य सूचना आयुक्त के रूप में नियुक्त किया है।
सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने इस संबंध में आधिकारिक राजपत्र (Gazette) अधिसूचना जारी कर दी है।
लंबित अपीलों के निपटारे में आएगी तेजी
सूचना आयोग में आयुक्तों की कमी के कारण पिछले कई महीनों से कामकाज प्रभावित हो रहा था। इस निर्णय से RTI आवेदकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है:
बढ़ेगा वर्कलोड मैनेजमेंट: आयोग में लंबित हजारों द्वितीय अपीलों और शिकायतों का अब जल्द निराकरण हो सकेगा।
समय सीमा का पालन: सूचना मिलने में हो रही महीनों की देरी अब कम होगी।
पारदर्शिता को धार: रिक्त पदों के भरने से आयोग की कार्यक्षमता में सुधार होगा और विभागों पर जवाबदेही बढ़ेगी।
लोकतंत्र के ‘तीसरे नेत्र’ को मिली मजबूती
RTI अधिनियम, 2005 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पूर्णकालिक आयुक्तों का होना अनिवार्य है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन नियुक्तियों से:
भ्रष्टाचार पर अंकुश: लंबित मामलों की सुनवाई तेज होने से भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई संभव होगी।
प्रशासनिक कसावट: लोक सूचना अधिकारियों (PIO) में अब समय पर जानकारी देने का दबाव बढ़ेगा।
जनता का भरोसा: न्याय मिलने में देरी से निराश हो चुके RTI कार्यकर्ताओं में एक नया उत्साह देखा जा रहा है।
नई नियुक्तियों के बाद अब मुख्य चुनौती ‘पेंडेंसी’ (लंबित मामले) को खत्म करना है। प्रदेशभर के आवेदकों को उम्मीद है कि नए आयुक्त न केवल मामलों को निपटाएंगे, बल्कि सूचना छिपाने वाले अधिकारियों पर जुर्माना लगाने जैसी सख्त कार्रवाई भी करेंगे।
राज्य सरकार का यह कदम सूचना के अधिकार को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए सराहनीय है। अब देखना यह होगा कि नई टीम किस गति से फाइलों के अंबार को कम कर जनता को ‘सूचना का अधिकार’ दिला पाती है




