आरटीआई में गोलमोल जवाब देना पड़ा भारी: मझौली के युवक ने जिला पंचायत में ठोंकी प्रथम अपील
मझौली/जबलपुर।
डिजिटल इंडिया और पारदर्शिता के दावों के बीच सरकारी दफ्तरों में सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम की धज्जियां उड़ने का एक गंभीर मामला सामने आया है। मझौली निवासी शिवम साहू ने कलेक्टर कार्यालय जबलपुर द्वारा दिए गए ‘अधूरे और भ्रामक’ जवाब के खिलाफ प्रथम अपीलीय अधिकारी, जिला पंचायत जबलपुर के समक्ष अपील दायर कर दी है। इस अपील ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि इसमें सीधे तौर पर अधिकारियों द्वारा आवेदक को गुमराह करने के आरोप लगाए गए हैं।
क्या है पूरा मामला?
वार्ड क्रमांक 10, मझौली निवासी शिवम साहू ने भ्रष्टाचार या जनहित से जुड़े किसी गंभीर मुद्दे पर (विवरण सुरक्षित) RTI के तहत जानकारी मांगी थी। कलेक्टर कार्यालय (लोक सूचना शाखा) ने इसके जवाब में पत्र क्रमांक /85/लो.सू.शाखा/2025 दिनांक 23/03/2025 जारी किया। लेकिन, यह जवाब जानकारी देने के बजाय पहेली सुलझाने जैसा निकला।
अपील के 5 मुख्य बिंदु: क्यों घेरे में आए अधिकारी?
आवेदक शिवम साहू ने अपनी अपील में प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल खड़े किए हैं:
गायब है मूल आवेदन: विभाग ने जवाब तो दिया, लेकिन उसमें यह जिक्र ही नहीं किया कि किस आवेदन पर कार्रवाई की गई है।
तारीख और विषय का अता-पता नहीं: RTI कानून कहता है कि जवाब स्पष्ट होना चाहिए, लेकिन यहाँ न आवेदन की तिथि बताई गई और न ही विषय।
*सिर्फ कागजी खानापूर्ति: आवेदन को जिला पंचायत स्थानांतरित कर दिया गया, लेकिन इसका ठोस कारण नहीं बताया गया।
गुमराह करने की साजिश: अपील में स्पष्ट कहा गया है कि यह सब जानकारी देने से बचने और आवेदक को भटकाने के लिए किया गया है।
कानून का उल्लंघन: RTI अधिनियम की धारा 6 और 7 के तहत समयबद्ध और स्पष्ट जानकारी देना अनिवार्य है, जिसका यहाँ खुला उल्लंघन प्रतीत होता है।
दंडात्मक कार्यवाही की मांग
शिवम साहू ने प्रथम अपीलीय अधिकारी से मांग की है कि लापरवाह लोक सूचना अधिकारी को बिंदुवार जानकारी देने के लिए निर्देशित किया जाए। साथ ही, धारा 20 के तहत उन अधिकारियों पर जुर्माना और दंडात्मक कार्यवाही की जाए जिन्होंने भ्रामक जानकारी देकर कानून का मजाक बनाया है।
अक्सर देखा जाता है कि रसूखदार विभागों में आरटीआई आवेदन को एक टेबल से दूसरी टेबल पर फुटबॉल की तरह घुमाया जाता है। शिवम साहू का यह कदम उन सभी नागरिकों के लिए प्रेरणा है जो सरकारी सिस्टम की अपारदर्शिता से लड़ रहे हैं। अब देखना यह होगा कि जिला पंचायत के अपीलीय अधिकारी इस मामले में न्याय करते हैं या लीपापोती।
मझौली दर्पण न्यूज़ के लिए विशेष ब्यूरो रिपोर्ट




