सिंगरौली में ‘ऑपरेशन फेस’ का बड़ा खुलासा: एक ही महिला के चेहरे से 340 सिम एक्टिवेट, डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था तार-तार
सिंगरौली (मध्य प्रदेश)।
देश में डिजिटल इंडिया के दौर में जहाँ सुरक्षा के कड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसने पूरी व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। जिले की पुलिस द्वारा चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन फेस’ के तहत एक हाईटेक गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है, जिसने फेशियल रिकग्निशन (Facial Recognition) तकनीक को चकमा देकर सैंकड़ों फर्जी सिम कार्ड जारी करा लिए। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गिरोह ने सिर्फ एक ही महिला के चेहरे का इस्तेमाल कर 340 से अधिक सिम कार्ड एक्टिवेट करवा लिए। यह मामला डिजिटल पहचान प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
POS ऑपरेटर निकला मास्टरमाइंड, माँ के चेहरे का किया इस्तेमाल
पुलिस की जाँच में इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड सिम पॉइंट-ऑफ-सेल (PoS) ऑपरेटर अनिल कुमार रवानी निकला। अनिल ने डिजिटल KYC प्रक्रिया में मौजूद खामियों का फायदा उठाने के लिए एक शातिर तरीका अपनाया। उसने अपनी ही माँ, उर्मिला रवानी के चेहरे का इस्तेमाल सिम एक्टिवेशन के लिए किया।
आरोपी अनिल हर बार अलग-अलग एंगल, रोशनी और चेहरे के हाव-भाव (Expression) के साथ अपनी माँ के फोटो और वीडियो कैप्चर करता था। फेशियल ऑथेंटिकेशन सिस्टम (Facial Authentication System) इन मामूली बदलावों को हर बार एक नए व्यक्ति की पहचान मानकर धोखा खा जाता था। इसी तकनीक का इस्तेमाल कर उसने एक के बाद एक 340 सिम कार्ड जारी कर दिए। पुलिस के अनुसार, इस गिरोह ने इसी तरह की अन्य तकनीकों का इस्तेमाल कर कुल 850 से अधिक फर्जी सिम कार्ड बाजार में उतार दिए।
फर्जी सिम कार्ड्स का अवैध गतिविधियों में इस्तेमाल की आशंका
इतनी बड़ी संख्या में फर्जी सिम कार्ड्स के जारी होने से सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। पुलिस को अंदेशा है कि इन सिम कार्ड्स का इस्तेमाल गंभीर अपराधों और अवैध गतिविधियों में किया जा सकता है, जैसे:
साइबर फ्रॉड और OTP ठगी: फिशिंग और ऑनलाइन बैंकिंग धोखाधड़ी के लिए।
फर्जी कॉलिंग और धमकी: रंगदारी और आतंकी धमकियों के लिए पहचान छिपाने हेतु।
ऑनलाइन ठगी नेटवर्क: फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल और पोर्टल्स के संचालन के लिए।
पहचान छिपाने के मामले: आपराधिक नेटवर्क के बीच संचार के लिए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सिंगरौली पुलिस अब जारी किए गए सभी 850 सिम कार्ड्स की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और ट्रांजेक्शन हिस्ट्री खंगाल रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनका उपयोग कहाँ और किस उद्देश्य से किया गया है।
पुलिस की कार्रवाई और डिजिटल सिस्टम पर सवाल
सिंगरौली पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मुख्य आरोपी अनिल कुमार रवानी को गिरफ्तार कर लिया है। गिरोह के अन्य सदस्यों और इस धोखाधड़ी में शामिल अन्य PoS ऑपरेटरों की तलाश जारी है। पुलिस ने संबंधित टेलीकॉम कंपनियों को भी अलर्ट जारी कर फर्जी सिम कार्ड्स के बारे में सूचित किया है और उनकी डिजिटल KYC प्रक्रियाओं की जाँच शुरू कर दी है।
यह मामला साफ तौर पर संकेत देता है कि फेशियल वेरिफिकेशन और रिकग्निशन जैसे एडवांस डिजिटल सुरक्षा सिस्टम भी पूरी तरह अचूक नहीं हैं। अगर चेहरे के मामूली हाव-भाव बदलने से सिस्टम को धोखा दिया जा सकता है, तो देश भर में चल रहे आधार-आधारित डिजिटल KYC (e-KYC) सिस्टम की सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। यह घटना डिजिटल पहचान की चोरी और उसके दुरुपयोग की बढ़ती चुनौती को उजागर करती है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की धोखाधड़ी को रोकने के लिए टेलीकॉम कंपनियों और सरकार को सख्त कदम उठाने की जरूरत है।
* लाइवनेस डिटेक्शन (Liveness Detection) को मजबूत करना: केवल स्थिर फोटो नहीं, बल्कि वास्तविक समय में पलकें झपकाना या सिर हिलाने जैसी गतिविधियों को अनिवार्य किया जाए, ताकि फोटो या मास्क का इस्तेमाल न हो सके।
* मल्टी-लेयर वेरिफिकेशन (Multi-layer Verification): केवल फेशियल रिकग्निशन पर निर्भर न रहकर, बायोमेट्रिक (उंगलियों के निशान) और दस्तावेज़ सत्यापन के साथ-साथ OTP सत्यापन को भी अनिवार्य किया जाए।
* PoS ऑपरेटरों की सख्त मॉनिटरिंग: सिम बेचने वाले ऑपरेटरों की नियमित जाँच और संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत कार्रवाई की जाए।
सिंगरौली का यह मामला डिजिटल सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा अलार्म है। यह साबित करता है कि जैसे-जैसे तकनीक एडवांस हो रही है, अपराधी भी उतने ही हाईटेक होते जा रहे हैं। अब देखना यह है कि क्या हमारी डिजिटल पहचान सच में सुरक्षित है, या यह सिर्फ एक चेहरे का खेल बनकर रह गई है?
ब्यूरो रिपोर्ट, सिंगरौली – मझौली दर्पण न्यूज




