जनपद पंचायत मझौली क्षेत्र की ग्राम पंचायत खितौला एक बार फिर सवालों के घेरे में है।
मझौली जबलपुर
इस बार मामला मनरेगा (रोजगार गारंटी) के तहत कराए गए कार्यों से जुड़ा है, जहां पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
आरटीआई में मांगी जानकारी, लेकिन नहीं मिला जवाब
वार्ड क्रमांक 12 निवासी वारेलाल बर्मन द्वारा सूचना का अधिकार (RTI) के तहत आवेदन देकर वर्ष 2024-25 के नवंबर, दिसंबर और जनवरी माह में कराए गए कार्यों के
मस्टर रोल और खसरा विवरण मांगे गए थे लेकिन ग्राम पंचायत खितौला के अधिकारियों ने जानकारी देने से साफ इनकार कर दिया
कारण बताया गया कि “आवेदन अपूर्ण है”।
क्या छिपाया जा रहा है? सबसे बड़ा सवाल अब यही उठ रहा है:अगर सब कुछ सही है, तो जानकारी देने में हिचक क्यों? क्या मनरेगा कार्यों में कोई गड़बड़ी है?
सूत्रों का कहना है कि कई कार्यों में फर्जी मस्टर रोल और कागजों में काम दिखाने की आशंका है
सरकारी धन पर सवाल मनरेगा योजना के तहत करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं।
ऐसे में यदि:कार्य वास्तविक नहीं हुए या रिकॉर्ड में हेराफेरी की गई तो यह सीधे-सीधे सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला बन सकता है।
–प्रथम अपील दाखिल, बढ़ेगा दबाव
जानकारी न मिलने पर आवेदक द्वारा अब
प्रथम अपील जनपद पंचायत मझौली में दायर की गई है जिसके बाद यह मामला और गंभीर हो गया है और अधिकारियों पर जवाब देने का दबाव बढ़ गया है।
-जांच की मांग तेज स्थानीय लोगों का कहना है कि:पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए दोषी पाए जाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए
अब नजर इस बात पर टिकी है कि जनपद पंचायत और जिला प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और क्या सच्चाई सामने आ पाएगी या नहीं
क्या मनरेगा में फर्जीवाड़ा हो रहा है? क्या रिकॉर्ड छिपाने की कोशिश की जा रही है? और कब तक जनता को अंधेरे में रखा जाएगा?




