सरकारी योजनाओं पर लग रहा पलीता, जनपद पंचायत मझौली के अधिकारी मौन
मझौली (जबलपुर)।
जनपद पंचायत मझौली के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत खितौला इन दिनों भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही का केंद्र बनी हुई है। शासन द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं को जनता तक पहुँचाने का दावा करने वाले जिम्मेदार स्वयं ही मैदान से नदारद हैं। पंचायत भवन में अक्सर ताला लटका रहता है, जिसके कारण ग्रामीणों को अपनी छोटी-छोटी समस्याओं के लिए भी दर-दर भटकना पड़ रहा है।
लापरवाही की भेंट चढ़ता ‘विकास’
ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि पंचायत सचिव और रोजगार सहायक की मनमानी के चलते मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास, और स्वच्छता मिशन जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं पूरी तरह ठप पड़ी हैं। पंचायत भवन बंद रहने के कारण पात्र हितग्राही अपने आवेदन तक जमा नहीं कर पा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब भी वे पंचायत आते हैं, उन्हें केवल गेट पर लटका ताला ही नसीब होता है।
गुप्त सूत्रों का बड़ा खुलासा: कागजों पर हो रहा खेल?
विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सचिव और रोजगार सहायक की इस बेखौफ अनुपस्थिति के पीछे एक गहरा राज छुपा हो सकता है। चर्चा है कि:
कागजी उपस्थिति: क्षेत्र से गायब रहने के बावजूद सचिव और रोजगार सहायक की उपस्थिति कागजों पर दर्ज हो रही है।
मिलीभगत की आशंका: जनपद कार्यालय में पदस्थ कुछ अधिकारियों की कथित ‘मौन सहमति’ के चलते इन लापरवाह कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
भ्रष्टाचार की बू: सूत्रों का दावा है कि पंचायत भवन बंद रखकर गुपचुप तरीके से मस्टर रोल और अन्य वित्तीय दस्तावेजों में हेरफेर की आशंका है, ताकि धरातल पर काम किए बिना ही राशि का आहरण किया जा सके।
अधिकारियों की चुप्पी पर उठे सवाल
हैरानी की बात यह है कि ग्रामीणों द्वारा कई बार जनपद पंचायत मझौली के वरिष्ठ अधिकारियों को इस अव्यवस्था की लिखित और मौखिक सूचना दी जा चुकी है। बावजूद इसके, आज तक न तो पंचायत का औचक निरीक्षण किया गया और न ही दोषियों को नोटिस जारी किया गया। अधिकारियों की यह उदासीनता प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े करती है।




