कर्ज बढ़ता गया, जनता पूछ रही हिसाब: आखिर विकास कहाँ हो रहा है?
भोपाल
विपक्ष और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि राज्य में विकास का गणित आम जनता की समझ से परे होता जा रहा है। एक ओर युवा बेरोजगारी से हताश हैं, किसान आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं और महंगाई आम लोगों की कमर तोड़ रही है, वहीं दूसरी ओर सरकार लगातार कर्ज लेती जा रही है।
जानकारी के अनुसार प्रदेश पर पहले से ही करीब ₹5 लाख 66 हजार करोड़ का भारी-भरकम कर्ज बताया जा रहा है। इसके बावजूद सरकार एक बार फिर Reserve Bank of India के माध्यम से लगभग ₹5800 करोड़ का नया कर्ज लेने की तैयारी में है। इस कदम को लेकर विपक्ष ने सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं।
आलोचकों का कहना है कि यदि प्रदेश में इतना विकास हो रहा है तो फिर बेरोजगारी, किसान संकट और महंगाई जैसी समस्याएं क्यों बनी हुई हैं। हाल के समय में कुछ जगहों पर हाईवे और पुलों की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठे हैं, जिससे सरकारी निर्माण कार्यों की पारदर्शिता पर भी बहस छिड़ गई है।
विपक्ष का आरोप है कि बढ़ते कर्ज का बोझ अंततः प्रदेश की जनता पर ही पड़ता है, क्योंकि सरकार को इसका भुगतान टैक्स और अन्य राजस्व से करना होता है। ऐसे में आम नागरिक खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है और यह सवाल उठा रहा है कि आखिर सरकार उधार लेकर प्रदेश में किस प्रकार का विकास कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में बढ़ते कर्ज और आर्थिक प्रबंधन का मुद्दा प्रदेश की राजनीति में बड़ा विषय बन सकता है, जिस पर सरकार को भी स्पष्ट जवाब देना पड़ सकता है।




