1931 से 1971 तक “माझी” कौन? सरकार पहले दे जवाब, फिर मांगे 1950 का रिकॉर्ड
मझौली/जबलपुर
सामाजिक संगठनों और स्थानीय प्रतिनिधियों का कहना है कि जब 1931 से लेकर 1971 तक पूर्व विंध्य प्रदेश के आठ जिलों को छोड़कर अन्य जिलों में “माझी” की स्थिति और पहचान स्पष्ट नहीं की गई, तो अब सरकार 1950 के रिकॉर्ड की मांग कैसे कर सकती है।
जानकारों का कहना है कि उस दौर में कई समुदायों का वर्गीकरण अलग-अलग प्रशासनिक व्यवस्थाओं के कारण भिन्न रूप से दर्ज हुआ था। ऐसे में यदि सरकार आज किसी समुदाय से 1950 के दस्तावेज़ या प्रमाण मांगती है, तो पहले यह स्पष्ट करना जरूरी है कि उस समय सरकारी अभिलेखों में “माझी” की स्थिति क्या दर्ज थी और किन जिलों में इसे किस श्रेणी में रखा गया था।
समाज के लोगों का कहना है कि पूर्व विंध्य प्रदेश के जिन आठ जिलों में “माझी” की स्पष्ट पहचान दर्ज है, उनके अलावा बाकी जिलों के संबंध में सरकार को ऐतिहासिक अभिलेख और प्रशासनिक स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए। तभी लोगों से पुराने रिकॉर्ड की मांग करना न्यायसंगत होगा।
समाज के प्रतिनिधियों ने सरकार से मांग की है कि 1931 से 1971 के बीच की जनगणना, राजस्व और प्रशासनिक अभिलेख सार्वजनिक किए जाएं और यह स्पष्ट किया जाए कि उस अवधि में “माझी” समुदाय की वास्तविक स्थिति क्या थी। उनका कहना है कि पारदर्शिता और स्पष्टता के बिना पुराने दस्तावेज़ मांगना समाज के साथ अन्याय के समान है।




