देश की आर्थिक व्यवस्था और मुद्रा प्रणाली को लेकर सूचना के अधिकार (RTI) के जरिए उठे सवालों ने नई बहस छेड़ दी है।




दिल्ली
एक आवेदक ने Reserve Bank of India से पूछा कि भारत में पैसा कैसे बनता है, इसका कानूनी आधार क्या है और क्या इस व्यवस्था में जनता की राय ली जाती है।
आरबीआई ने अपने जवाब में बताया कि देश में नोट और मुद्रा जारी करने की प्रक्रिया Reserve Bank of India Act, 1934 के तहत होती है। साथ ही महंगाई को नियंत्रित रखने के लिए Monetary Policy Committee द्वारा 4 प्रतिशत (±2%) का लक्ष्य तय किया गया है, जो फिलहाल 31 मार्च 2026 तक लागू है।
हालांकि आरटीआई में पूछे गए कई महत्वपूर्ण सवालों पर आरबीआई ने सीधे जवाब देने के बजाय अपनी वेबसाइट के लिंक का हवाला दिया और कुछ सूचनाएं देने से RTI अधिनियम की धारा 2(f) का उल्लेख करते हुए इनकार कर दिया।
इस घटनाक्रम के बाद सवाल उठने लगे हैं कि जब मुद्रा नीति, महंगाई और आर्थिक फैसलों का सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ता है, तो क्या नागरिकों को पूरी पारदर्शी जानकारी मिलनी चाहिए? विशेषज्ञों का कहना है कि लोकतंत्र में जनता को आर्थिक नीतियों की समझ और जानकारी मिलना बेहद जरूरी है।
अब यह मामला पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर चर्चा का विषय बन गया है, और आवेदक ने संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे को कानूनी रूप से आगे भी उठाएगा, ताकि देश के नागरिकों को आर्थिक व्यवस्था से जुड़ी अधिक स्पष्ट जानकारी मिल सके।




