ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और विकास कार्यों को गति देने वाली Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act (मनरेगा) योजना के तहत अब कार्यों को और अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और परिणाम आधारित बनाने की पहल की गई है।
दिल्ली
नई व्यवस्था के तहत श्रमिकों की संख्या के अनुसार समूह बनाकर कार्यों का स्पष्ट ले-आउट तैयार किया जाएगा, जिससे काम की योजना और क्रियान्वयन दोनों अधिक प्रभावी हो सकेंगे।
इसके साथ ही प्रत्येक दिन किए गए कार्य की प्रगति की नियमित रिपोर्टिंग की जाएगी। मेट और ग्राम रोजगार सहायक (GRS) की निगरानी में अंतिम माप सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि कार्य की गुणवत्ता और पारदर्शिता बनी रहे। अधिकारियों का कहना है कि इससे मनरेगा के तहत होने वाले विकास कार्यों में अनियमितताओं की संभावना कम होगी और श्रमिकों को उनके कार्य के अनुरूप सही भुगतान मिल सकेगा।
नई व्यवस्था में मस्टररोल, कार्य माप और भुगतान की प्रक्रिया को भी अधिक स्पष्ट और जवाबदेह बनाया जा रहा है। इसके अलावा ग्राम स्तर से लेकर राज्य स्तर तक चार-स्तरीय मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया जाएगा, जिससे हर कार्य पर सख्त नजर रखी जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बढ़ेगी और ग्रामीण विकास कार्यों की गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिलेगा।




