सीएमएचओ ने ली निजी अस्पतालों के प्रबंधकों व संचालकों की बैठक
कटनी – ‘
प्रधानमंत्री राहत योजना’ के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु कलेक्टर श्री आशीष तिवारी के निर्देश पर शनिवार को जिला चिकित्सालय कटनी में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राज सिंह ठाकुर की अध्यक्षता में बैठक आयोजित कर 14 निजी अस्पतालों के संचालकों व प्रबंधकों को प्रधानमंत्री राहत योजना की विस्तृत जानकारी की गई।
सीएमएचओ ने बैठक में निजी अस्पतालों के प्रतिनिधियों को बताया कि सड़कों में हुये हर प्रकार के हादसे पीएम राहत योजना से कवर किये गये हैं। यह सुविधा हादसे की तारीख से 7 दिन तक मौजूद रहेगी। योजना का मुख्य उद्देश्य है कि शुरूआती गंभीर ईलाज के लिये परिवार को पैसों की चिंता नहीं करनी पड़ेगी। सड़क हादसके के बाद का पहला आधा घंटा यानी गोल्डन आवर महत्वपूर्ण माना जाता है। अगर इस दौरान घायल अस्पताल पहुंचता है तो उसकी जान बचने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिये अस्पताल प्रबंधकों से आग्रह किया गया कि वे बिना देर किये दुर्घटना पीडि़तों का उपचार शुरू करें।
बैठक में बताया गया कि अगर कहीं सड़क हादसा होता है तो घायल इंसान राहगीर या कोई भी अन्य व्यक्ति 112 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल कर सकता है। जिससे एम्बुलेंस की भी सुविधा मिल सकेगी। योजना के तहत डेढ़ लाख रूपये तक का कैशलेस ईलाज मिलेगा। अगर हालत ज्यादा गंभीर नहीं है तो 24 घंटे तक का स्टेबलाईजेशन ट्रीटमेंट और अगर जान को खतरा है तो 48 घंटे तक प्राथमिक एवं इमरजेंसी ईलाज का प्रावधान है। ईलाज शुरू करने से पहले पुलिस द्वारा इसकी पुष्टि आवश्यक है। यह पूरा प्रोसेस ऑनलाईन डिजिटल सिस्टम के जरिये होता है ताकि घायल के उपचार में देरी न हो। हादसे की रिपोर्ट से लेकर अस्पताल के भुगतान तक सब कुछ डिजिटल प्लेटफार्म पर होता है। इसके लिये इलेक्ट्रानिक डिटेल्ड डिजिटल रिपोर्ट और ट्रांजेक्शन मैनेजमेंट सिस्टम का उपयोग किया जाता है। योजना का लाभ सभी प्रकार की सड़कों पर मिलता है।
बैठक में सीएमएचओ ने निर्देशित किया कि पीएम राहत योजना के तहत आने वाले मरीजों को बिना किसी बाधा के इलाज मिलना चाहिए। उन्होंने अस्पतालों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि वे अपने परिसर में उपलब्ध सुविधाओं और पैकेजों की जानकारी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करें।
बैठक में पीएम राहत योजना के तहत मिलने वाली सहायता राशि और उसकी आवेदन प्रक्रिया के बारे में अस्पताल प्रतिनिधियों को तकनीकी जानकारी दी गई, ताकि वे मरीजों का मार्गदर्शन कर सकें।




